महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व
Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished2,450 पृष्ठ
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उस भीषण गर्जनासे समस्त लोकोंमें हलचल मच गयी। स्वर्गलोकमें इन्द्र आदि देवता भी अत्यन्त भयभीत हो उठे ॥ २३ ॥
निर्विचेष्टं जगच्चापि बभूवातिभृशं तदा ।
स्थावरं जङ्गमं चैव तेन नादेन मोहितम् ॥ २४ ॥
उस सिंहनादसे मोहित होकर समस्त चराचर जगत् अत्यन्त चेष्टारहित हो गया ॥ २४ ॥
ततस्ते दानवाः सर्वे तेन नादेन भीषिताः ।
पेतुर्गतासवश्चैव विष्णुतेजःप्रमोहिताः ॥ २५ ॥
तदनन्तर वे सब दानव भगवान्की उस गर्जनासे भयभीत हो प्राणशून्य होकर पृथ्वीपर गिर पड़े। वे सब-के-सब भगवान् विष्णुके तेजसे मोहित हो अपनी सुध-बुध खो बैठे थे ॥ २५ ॥
रसातलगतश्चापि वराहस्त्रिदशद्विषाम् ।
खुरैर्विदारयामास मांसमेदोऽस्थिसंचयान् ॥ २६ ॥