भारतकोश
महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,450 पृष्ठ

पृष्ठ 1997, कुल 2450 में से

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पृष्ठ 1997

सांख्यज्ञान सबसे उत्कृष्ट माना गया है। इस विषयमें तुम्हें तनिक भी संशय नहीं होना चाहिये। इसमें अक्षर, ध्रुव एवं पूर्ण सनातन ब्रह्मका ही प्रतिपादन हुआ है ॥ १०१ ॥ अनादिमध्यनिधनं निर्द्वन्द्वं कर्तृ शाश्वतम् । कूटस्थं चैव नित्यं च यद् वदन्ति मनीषिणः ॥ १०२ ॥ वह ब्रह्म आदि, मध्य और अन्तसे रहित, निर्द्वन्द्व, जगत्की उत्पत्तिका हेतुभूत, शाश्वत, कूटस्थ और नित्य है, ऐसा मनीषी पुरुष कहते हैं ॥ १०२ ॥ यतः सर्वाः प्रवर्तन्ते सर्गप्रलयविक्रियाः । यच्च शंसन्ति शास्त्रेषु वदन्ति परमर्षयः ॥ १०३ ॥ संसारकी सृष्टि और प्रलयरूप सारे विकार उसीसे सम्भव होते हैं। महर्षि अपने शास्त्रोंमें उसीकी प्रशंसा करते हैं ॥ १०३ ॥ सर्वे विप्राश्च देवाश्च तथा शमविदो जनाः । ब्रह्माणं परमं देवमनन्तं परमच्युतम् ॥ १०४ ॥ प्रार्थयन्तश्च तं विप्रा वदन्ति गुणबुद्धयः । सम्यग्युक्तास्तथा योगाः सांख्याश्चामितदर्शनाः ॥ १०५ ॥ समस्त ब्राह्मण, देवता और शान्तिका अनुभव करनेवाले लोग उसी अनन्त, अच्युत, ब्राह्मणहितैषी तथा परमदेव परमात्माकी स्तुति-प्रार्थना करते हैं। उनके गुणोंका चिन्तन करते हुए उनकी महिमाका गान करते हैं। योगमें उत्तम सिद्धिको प्राप्त हुए योगी तथा अपार ज्ञानवाले सांख्यवेत्ता पुरुष भी उसीके गुण गाते हैं ॥ अमूर्तस्तस्य कौन्तेय सांख्यं मूर्तिरिति श्रुतिः । अभिज्ञानानि तस्याहुर्मतं हि भरतर्षभ ॥ १०६ ॥ कुन्तीनन्दन! ऐसी प्रसिद्धि है कि यह सांख्यशास्त्र ही उस निराकार परमात्माका आकार है। भरतश्रेष्ठ! जितने ज्ञान हैं, वे सब सांख्यकी ही मान्यताका प्रतिपादन करते हैं ॥ १०६ ॥ द्विविधानीह भूतानि पृथिव्यां पृथिवीपते । जङ्गमागमसंज्ञानि जङ्गमं तु विशिष्यते ॥ १०७ ॥ पृथ्वीनाथ! इस भूतलपर स्थावर और जंगम—दो प्रकारके प्राणी उपलब्ध होते हैं। उनमें भी जंगम ही श्रेष्ठ है ॥ १०७ ॥ ज्ञानं महद् यद्धि महत्सु राजन् वेदेषु सांख्येषु तथैव योगे । यच्चापि दृष्टं विविधं पुराणे सांख्यागतं तन्निखिलं नरेन्द्र ॥ १०८ ॥ राजन्! नरेश्वर! महात्मा पुरुषोंमें, वेदोंमें, सांख्यों (दर्शनों) में, योगशास्त्रमें तथा पुराणोंमें जो नाना प्रकारका उत्तम ज्ञान देखा जाता है, वह सब सांख्यसे ही आया हुआ