महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व
Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 22, कुल 2450 में से
संदर्भ में पढ़ेंचित्र-सूची
[सादा]
१- सुवर्णमय पक्षीके रूपमें देवराज इन्द्रका संन्यासी बने हुए ब्राह्मण-बालकोंको उपदेश २- स्वयं श्रीकृष्ण शोकमग्न युधिष्ठिरको समझा रहे हैं ३- ध्यानमग्न श्रीकृष्णसे युधिष्ठिर प्रश्न कर रहे हैं ४- भगवान् श्रीकृष्णका देवर्षि नारद एवं पाण्डवोंको लेकर शरशय्यास्थित भीष्मके निकट गमन ५- राजासे हीन प्रजाकी ब्रह्माजीसे राजाके लिये प्रार्थना ६- राजा वेनके बाहु-मन्थनसे महाराज पृथुका प्राकट्य ७- राजा क्षेमदर्शी और कालकवृक्षीय मुनि ८- राजर्षि जनक अपने सैनिकोंको स्वर्ग और नरककी बात कह रहे हैं ९- कालकवृक्षीय मुनि राजा जनकका राजकुमार क्षेमदर्शीके साथ मेल करा रहे हैं १०- समुद्र देवताका मूर्तिमती नदियोंके साथ संवाद ११- चूहेकी सहायताके फलस्वरूप चाण्डालके जालसे बिलावकी मुक्ति १२- मरे हुए ब्राह्मण-बालकपर तथा गीध एवं गीदड़पर शंकरजीकी कृपा १३- काश्यप ब्राह्मणके प्रति गीदड़के रूपमें इन्द्रका उपदेश १४- इन्द्रको पहचाननेपर काश्यपद्वारा उनकी पूजा १५- महर्षि भृगुके साथ भरद्वाज मुनिका प्रश्नोत्तर १६- जापक ब्राह्मण एवं महाराज इक्ष्वाकुकी ऊर्ध्वगति १७- प्रजापति मनु एवं महर्षि बृहस्पतिका संवाद १८- भगवान् वराहकी ऋषियोंद्वारा स्तुति १९- महर्षि पञ्चशिखका महाराज जनकको उपदेश २०- देवर्षि एवं देवराजको भगवती लक्ष्मीका दर्शन २१- मुनि जाजलिकी तपस्या २२- चिरकारी शस्त्र त्यागकर अपने पिताको प्रणाम कर रहे हैं २३- सनकादि महर्षियोंकी शुक्राचार्य एवं वृत्रासुरसे भेंट २४- दक्षके यज्ञमें शिवजीका प्राकट्य २५- साध्यगणोंको हंसरूपमें ब्रह्माजीका उपदेश २६- महर्षि वसिष्ठका राजा कराल जनकको उपदेश २७- महर्षि याज्ञवल्क्यके स्मरणसे देवी सरस्वतीका प्राकट्य