भारतकोश
महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,450 पृष्ठ

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तदनन्तर शोकसे पड़ित हो उसकी माताएँ रोती हुई उस स्थानकी ओर दौड़ीं, जहाँ राजा सृंजय विलाप करते थे ।। ततः स राजा सस्मार मामेव गतमानसः । तदाहं चिन्तनं ज्ञात्वा गतवांस्तस्य दर्शनम् ।। ३९ ।। उस समय अचेत-से होकर राजाने मेरा ही स्मरण किया। तब मैंने उनका चिन्तन जानकर उन्हें दर्शन दिया ।।

मयैतानि च वाक्यानि श्रावितः शोकलालसः । यानि ते यदुवीरेण कथितानि महीपते ।। ४० ।। पृथ्वीनाथ! यदुवीर श्रीकृष्णने जो बातें तुम्हारे सामने कही हैं, उन्हींको मैंने उस शोकाकुल राजाको सुनाया ।। संजीवितश्चापि पुनर्वासवानुमते तदा । भवितव्यं तथा तच्च न तच्छक्यमतोऽन्यथा ।। ४१ ।।