भारतकोश
महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,450 पृष्ठ

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पृष्ठ 273

धर्मात्मा राजा युधिष्ठिरने सिंहासनपर बैठकर श्वेत पुष्प, स्वस्तिक, अक्षत, भूमि, सुवर्ण, रजत एवं मणिका स्पर्श किया ॥ ७ ॥ ततः प्रकृतयः सर्वाः पुरस्कृत्य पुरोहितम् । ददृशुर्धर्मराजानमादाय बहुमङ्गलम् ॥ ८ ॥ इसके बाद मन्त्री, सेनापति आदि सभी प्रकृतियोंने पुरोहितको आगे करके बहुत-सी माङ्गलिक सामग्री साथ लिये धर्मराज युधिष्ठिरका दर्शन किया ॥ ८ ॥ पृथिवीं च सुवर्णं च रत्नानि विविधानि च । आभिषेचनिकं भाण्डं सर्वसम्भारसम्भृतम् ॥ ९ ॥ काञ्चनोदुम्बरास्तत्र राजताः पृथिवीमयाः । पूर्णकुम्भाः सुमनसो लाजा बर्हीषि गोरसम् ॥ १० ॥ शमीपिप्पलपालाशसमिधो मधुसर्पिषी । स्रुव औदुम्बरः शंखस्तथा हेमविभूषितः ॥ ११ ॥ मिट्टी, सुवर्ण, तरह-तरहके रत्न, राज्याभिषेककी सामग्री, सब प्रकारके आवश्यक सामान, सोने, चाँदी, ताँबे और मिट्टीके बने हुए जलपूर्ण कलश, फूल, लाजा (खील), कुशा, गोरस, शमी, पीपल और पलाशकी समिधाएँ, मधु, घृत, गूलरकी लकड़ीका स्रुवा तथा स्वर्णजटित शंख—ये सब वस्तुएँ वे संग्रह करके लाये थे ॥ ९—११ ॥ दाशार्हेणाभ्यनुज्ञातस्तत्र धौम्यः पुरोहितः । प्रागुदक्प्रवणां वेदीं लक्षणेनोपलिख्य च ॥ १२ ॥ व्याघ्रचर्मोत्तरे शुक्ले सर्वतोभद्र आसने । दृढपादप्रतिष्ठाने हुताशनसमत्विषि ॥ १३ ॥ उपवेश्य महात्मानं कृष्णां च द्रुपदात्मजाम् । जुहाव पावकं धीमान् विधिमन्त्रपुरस्कृतम् ॥ १४ ॥ भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे पुरोहित धौम्यजीने एक वेदी बनायी जो पूर्व और उत्तर दिशाकी ओर नीची थी। उसे गोबरसे लीपकर कुशके द्वारा उसपर रेखा की। इस प्रकार वेदीका संस्कार करके सर्वतोभद्र नामक एक चौकीपर बाघम्बर एवं श्वेत वस्त्र बिछाकर उसके ऊपर महात्मा युधिष्ठिर तथा द्रुपदकुमारी कृष्णाको बिठाया। उस चौकीके पाये और बैठनेके आधार बहुत मजबूत थे। सुवर्णजटित होनेके कारण वह आसन प्रज्वलित अग्निके समान प्रकाशित हो रहा था। बुद्धिमान् पुरोहितने वेदीपर अग्निको स्थापित करके उसमें विधि और मन्त्रके साथ आहुति दी ॥ १२—१४ ॥ तत उत्थाय दाशार्हः शंखमादाय पूजितम् । अभ्यषिञ्चत् पतिं पृथ्व्याः कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम् ॥ १५ ॥ धृतराष्ट्रश्च राजर्षिः सर्वाः प्रकृतयस्तथा ।