भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1110, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 1110

ऋषीणां चैव गुह्यानि यः पठेदाह्निकं सदा ॥ ८ ॥ शृणुयाद् वानसूयुर्यः श्रद्दधानः समाहितः । नास्य विघ्नः प्रभवति भयं चास्य न विद्यते ॥ ९ ॥ **भगवान् विष्णु बोले—**जो देवताओं तथा महात्मा ऋषियोंके बताये हुए धर्मसम्बन्धी इन सभी गूढ़ रहस्योंका प्रतिदिन पाठ करेगा अथवा दोषदृष्टिसे रहित हो सदा एकाग्रचित्त रहकर श्रद्धापूर्वक श्रवण करेगा, उसपर किसी विघ्नका प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा उसे कोई भय भी नहीं प्राप्त होगा ॥ ८-९ ॥

ये च धर्माः शुभाः पुण्याः सरहस्या उदाहृताः । तेषां धर्मफलं तस्य यः पठेत् जितेन्द्रियः ॥ १० ॥ यहाँ जिन-जिन पवित्र एवं कल्याणकारी धर्मोंका रहस्योंसहित वर्णन किया गया है, उन सबका जो इन्द्रियसंयमपूर्वक पाठ करेगा, उसे उन धर्मोंका पूरा-पूरा फल प्राप्त होगा ॥ १० ॥ नास्य पापं प्रभवति न च पापेन लिप्यते । पठेद् वा श्रावयेद् वापि श्रुत्वा वा लभते फलम् ॥ ११ ॥ भुञ्जते पितरो देवा हव्यं कव्यमथाक्षयम् ।