महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1602, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंगिरिशाय प्रशान्ताय यतये चीरवाससे । बिल्वदण्डाय सिद्धाय सर्वदण्डधराय च ॥ १७ ॥ मृगव्याधाय महते धन्विनेऽथ भवाय च । वराय सोमवक्त्राय सिद्धमन्त्राय चक्षुषे ॥ १८ ॥ हिरण्यबाहवे राजन्नुग्राय पतये दिशाम् । लेलिहानाय गोष्ठाय सिद्धमन्त्राय वृष्णये ॥ १९ ॥ पशूनां पतये चैव भूतानां पतये नमः । वृषाय मातृभक्ताय सेनान्ये मध्यमाय च ॥ २० ॥ सुहस्ताय पतये धन्विने भार्गवाय च । अजाय कृष्णनेत्राय विरूपाक्षाय चैव ह ॥ २१ ॥ तीक्ष्णदंष्ट्राय तीक्ष्णाय वैश्वानरमुखाय च । महाद्युतयेऽनङ्गाय सर्वाय पतये विशाम् ॥ २२ ॥ विलोहिताय दीप्ताय दीप्ताक्षाय महौजसे । वसुरेतःसुवपुषे पृथवे कृत्तिवाससे ॥ २३ ॥ कपालमालिने चैव सुवर्णमुकुटाय च । महादेवाय कृष्णाय त्र्यम्बकायानघाय च ॥ २४ ॥ क्रोधनायानृशंसाय मृदवे बाहुशालिने । दण्डिने तप्ततपसे तथैवाक्रूरकर्मणे ॥ २५ ॥ सहस्रशिरसे चैव सहस्रचरणाय च । नमः स्वधास्वरूपाय बहुरूपाय दंष्ट्रिणे ॥ २६ ॥
‘भगवन्! आप रुद्र (दुःखके कारणको दूर करनेवाले), शितिकण्ठ (गलेमें नील चिह्न धारण करनेवाले), पुरुष (अन्तर्यामी), सुवर्चा (अत्यन्त तेजस्वी), कपर्दी (जटा-जूटधारी), कराल (भयंकर रूपवाले), हर्यक्ष (हरे नेत्रोंवाले), वरद (भक्तोंको अभीष्ट वर प्रदान करनेवाले), त्र्यक्ष (त्रिनेत्रधारी), पूषाके दाँत उखाड़नेवाले, वामन, शिव, याम्य (यमराजके गणस्वरूप), अव्यक्तरूप, सद्वृत्त (सदाचारी), शंकर, क्षेम्य (कल्याणकारी), हरिकेश (भूरे केशोंवाले), स्थाणु (स्थिर), पुरुष, हरिनेत्र, मुण्ड, क्रुद्ध, उत्तरण (संसार-सागरसे पार उतरनेवाले), भास्कर (सूर्यरूप), सुतीर्थ (पवित्र तीर्थरूप), देवदेव, रंहस (वेगवान्), उष्णीषी (सिरपर पगड़ी धारण करनेवाले), सुवक्त्र (सुन्दर मुखवाले), सहस्राक्ष (हजारों नेत्रोंवाले), मीढ्वान् (कामपूरक), गिरिश (पर्वतपर शयन करनेवाले), प्रशान्त, यति (संयमी), चीरवासा (चीरवस्त्र धारण करनेवाले), विल्वदण्ड (बेलका डंडा धारण करनेवाले), सिद्ध, सर्वदण्डधर (सबको दण्ड देनेवाले), मृगव्याध (आर्द्रा-नक्षत्रस्वरूप), महान्, धन्वी (पिनाक नामक धनुष धारण करनेवाले), भव (संसारकी उत्पत्ति करनेवाले), वर (श्रेष्ठ), सोमवक्त्र (चन्द्रमाके समान मुखवाले), सिद्धमन्त्र (जिन्होंने सभी मन्त्र सिद्ध