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महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1985, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 1985

'ये पाण्डुपुत्र धनंजय अद्वितीय वीर, महान् तेजस्वी, धर्मात्मा तथा मेरे पिता थे। इनका वध करके मैंने महान् पाप किया है। अब मेरा उद्धार कैसे हो सकता है?' ।। ३९ ।। इत्येवमुक्त्वा नृपते धनंजयसुतो नृपः । उपस्पृश्याभवत् तूष्णीं प्रायोपेतो महामतिः ॥ ४० ॥ नरेश्वर! ऐसा कहकर धनंजयकुमार परम बुद्धिमान् राजा बभ्रुवाहन पुनः आचमन करके आमरण उपवासका व्रत लेकर चुपचाप बैठ गया ।। ४० ।।

वैशम्पायन उवाच

प्रायोपविष्टे नृपतौ मणिपूरेश्वरे तदा । पितृशोकसमाविष्टे सह मात्रा परंतप ॥ ४१ ॥ उलूपी चिन्तयामास तदा संजीवनं मणिम् । स चोपातिष्ठत तदा पन्नगानां परायणम् ॥ ४२ ॥ **वैशम्पायनजी कहते हैं—**शत्रुओंको संताप देनेवाले जनमेजय! पिताके शोकसे संतप्त हुआ मणिपूरनरेश बभ्रुवाहन जब माताके साथ आमरण उपवासका व्रत लेकर बैठ गया, तब उलूपीने संजीवनमणिका स्मरण किया। नागोंके जीवनकी आधारभूत वह मणि उसके स्मरण करते ही वहाँ आ गयी ।। ४१-४२ ।।

तं गृहीत्वा तु कौरव्य नागराजपतेः सुता । मनःप्रह्लादनीं वाचं सैनिकानामथाब्रवीत् ॥ ४३ ॥ कुरुनन्दन! उस मणिको लेकर नागराजकुमारी उलूपी सैनिकोंके मनको आह्लाद प्रदान करनेवाली बात बोली— ।। ४३ ।।

उत्तिष्ठ मा शुचः पुत्र नैव विष्णुस्त्वया जितः । अजेयः पुरुषैरेष तथा देवैः सवासवैः ॥ ४४ ॥ 'बेटा बभ्रुवाहन! उठो, शोक न करो! ये अर्जुन तुम्हारे द्वारा परास्त नहीं हुए हैं। ये तो सभी मनुष्यों और इन्द्रसहित सम्पूर्ण देवताओंके लिये भी अजेय हैं ।। ४४ ।।

मया तु मोहनी नाम मायैषा सम्प्रदर्शिता । प्रियार्थं पुरुषेन्द्रस्य पितुस्तेऽद्य यशस्विनः ॥ ४५ ॥ 'यह तो मैंने आज तुम्हारे यशस्वी पिता पुरुषप्रवर धनंजयका प्रिय करनेके लिये मोहनी माया दिखलायी है ।। ४५ ।।

जिज्ञासुर्ह्येष पुत्रस्य बलस्य तव कौरवः । संग्रामे युद्ध्यतो राजन्नागतः परवीरहा ॥ ४६ ॥ तस्मादसि मया पुत्र युद्धाय परिचोदितः । मा पापमात्मनः पुत्र शङ्केथा ह्यण्वपि प्रभो ॥ ४७ ॥

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व · पृष्ठ 1985, कुल 2566 में से · BharatKosha