भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 2126, कुल 2566 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 2126

जो भोजनमें भेद-भाव नहीं करता तथा जो नित्य पवित्र और श्रद्धासम्पन्न रहता है, वह दिव्य विमानके द्वारा इन्द्रलोकमें जाता है। वहाँ वह दिव्यरूपधारी और महायशस्वी होता है। अप्सराएँ उसके यशका गान करती हैं ।।
मन्वन्तरं तु तत्रैव क्रीडित्वा देवपूजितः ।
मानुष्यलोकमागम्य भोगवान् ब्राह्मणो भवेत् ।।
‘वह एक मन्वन्तरतक वहीं देवताओंसे पूजित होता है और क्रीड़ा करता रहता है। उसके बाद मनुष्यलोकमें आकर भोगसम्पन्न ब्राह्मण होता है’ ।।
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)