भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 2155, कुल 2566 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 2155

पाण्डवश्रेष्ठ! क्षत्रियोंके शरीरमें सात वृषल जानने चाहिये, वैश्योंके देहमें आठ वृषल बताये गये हैं और शूद्रोंमें इक्कीस वृषलोंका निवास माना गया है ।।
कामः क्रोधश्च लोभश्च मोहश्च मद एव च ।
महामोहश्च इत्येते देहे षड् वृषलाः स्मृताः ।।
काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह और महामोह—ये छः वृषल ब्राह्मणके शरीरमें स्थित बताये गये हैं ।।
गर्वः स्तम्भो ह्यहंकार ईर्ष्या च द्रोह एव च ।
पारुष्यं क्रूरता चैव सप्तैते क्षत्रियाः स्मृताः ।।
गर्व, स्तम्भ (जडता), अहंकार, ईर्ष्या, द्रोह, पारुष्य (कठोर बोलना) और क्रूरता—ये सात क्षत्रिय-शरीरमें रहनेवाले वृषल हैं ।।
तीक्ष्णतानिकृतिर्माया शाठ्यं दम्भो ह्यनार्जवम् ।
पैशुन्यमनृतं चैव वैश्यास्त्वष्टौ प्रकीर्तिताः ।।
तीक्ष्णता, कपट, माया, शठता, दम्भ, सरलताका अभाव, चुगली और असत्य-भाषण—ये आठ वैश्य-शरीरके वृषल हैं ।।
तृष्णा बुभुक्षा निद्रा च ह्याल्स्यं चाघृणादयः ।
आधिश्चापि विषादश्च प्रमादो हीनसत्त्वता ।।
भयं विक्लवता जाड्यं पापकं मन्युरेव च ।
आशा चाश्रद्धधानत्वमनवस्थाप्ययन्त्रणम् ।।
आशौचं मलिनत्वं च शूद्रा ह्येते प्रकीर्तिताः ।
यस्मिन्नेते न दृश्यन्ते स वै ब्राह्मण उच्यते ।।
तृष्णा, खानेकी इच्छा, निद्रा, आलस्य, निर्दयता, क्रूरता, मानसिक चिन्ता, विषाद, प्रमाद, अधीरता, भय, घबराहट, जडता, पाप, क्रोध, आशा, अश्रद्धा, अनवस्था, निरंकुशता, अपवित्रता और मलिनता—ये इक्कीस वृषल शूद्रके शरीरमें रहनेवाले बताये गये हैं। ये सभी वृषल जिसके भीतर न दिखायी दें, वही वास्तवमें ब्राह्मण कहलाता है ।।
तस्मात् तु सात्त्विको भूत्वा शुचिः क्रोधविवर्जितः ।
मामर्चयेत् तु सततं मत्प्रियत्वं यदिच्छति ।।
अतः ब्राह्मण यदि मेरा प्रिय होना चाहे तो सात्त्विक, पवित्र और क्रोधहीन होकर सदा मेरी पूजा करता रहे ।।
अलोलजिह्वः समुपस्थितो धृतिं
निधाय चक्षुर्युगमात्रमेव तत् ।
मनश्च वाचं च निगृह्य चञ्चलं
भयान्निवृत्तो मम भक्त उच्यते ।।

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व · पृष्ठ 2155, कुल 2566 में से · BharatKosha