महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2303, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंएतच्छ्रुत्वा तु वचनं विदुरस्य युधिष्ठिरः ॥ ६ ॥ हृष्टः सम्पूजयामास गुडाकेशश्च पाण्डवः । विदुरकी यह बात सुनकर युधिष्ठिर तथा पाण्डुपुत्र अर्जुन बड़े प्रसन्न हुए और उनकी सराहना करने लगे ॥
न च भीमो दृढक्रोधस्तद् वचो जगृहे तदा ॥ ७ ॥ विदुरस्य महातेजा दुर्योधनकृतं स्मरन् । परंतु महातेजस्वी भीमसेनके हृदयमें उनके प्रति अमिट क्रोध जमा हुआ था। उन्हें दुर्योधनके अत्याचारोंका स्मरण हो आया, अतः उन्होंने विदुरजीकी बात नहीं स्वीकार की ॥ ७ १/२ ॥
अभिप्रायं विदित्वा तु भीमसेनस्य फाल्गुनः ॥ ८ ॥ किरीटी किंचिदानम्य तमुवाच नरर्षभम् । भीमसेनके उस अभिप्रायको जानकर किरीटधारी अर्जुन कुछ विनीत हो उन नरश्रेष्ठसे इस प्रकार बोले— ॥ ८ १/२ ॥
भीम राजा पिता वृद्धो वनवासाय दीक्षितः ॥ ९ ॥ दातुमिच्छति सर्वेषां सुहृदामौर्ध्वदेहिकम् ।