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महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 2306, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 2306

‘पार्थ! क्या तुम उस बातको भूल गये, जब कि यह कुलांगार दुर्बुद्धि धृतराष्ट्र जुआ आरम्भ कराकर विदुरजीसे बार-बार पूछता था कि ‘इस दाँवमें हमलोगोंने क्या जीता है?’ ॥ २४ १/२ ॥

तमेवंवादिनं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः ।
उवाच वचनं धीमान् जोषमास्वेति भर्त्सयन् ॥ २५ ॥

भीमसेनको ऐसी बातें करते देख बुद्धिमान् कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिरने उन्हें डाँटकर कहा—‘चुप रहो’ ॥ २५ ॥

इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि आश्रमवासपर्वणि एकादशोऽध्यायः ॥ ११ ॥

इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत आश्रमवासपर्वमें ग्यारहवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ११ ॥

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व · पृष्ठ 2306, कुल 2566 में से · BharatKosha