भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 2380, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 2380

पुत्रशोकसमाविष्टा गान्धारी त्विदमब्रवीत् । श्वशुरं बद्धनयना देवी प्राञ्जलिरुत्थिता ॥ ३७ ॥ आँखोंपर पट्टी बाँधे गान्धारी देवी श्वशुरके सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो गयीं और पुत्रशोकसे संतप्त होकर इस प्रकार बोलीं ॥ ३७ ॥ षोडशेमानि वर्षाणि गतानि मुनिपुङ्गव । अस्य राज्ञो हतान् पुत्रान् शोचतो न शमो विभो ॥ ३८ ॥ मुनिवर! प्रभो! इन महाराजको अपने मरे हुए पुत्रोंके लिये शोक करते आज सोलह वर्ष बीत गये; किंतु अबतक इन्हें शान्ति नहीं मिली ॥ ३८ ॥ पुत्रशोकसमाविष्टो निःश्वसन् ह्येष भूमिपः । न शेते वसतीः सर्वा धृतराष्ट्रो महामुने ॥ ३९ ॥ 'महामुने! ये भूमिपाल धृतराष्ट्र पुत्रशोकसे संतप्त हो सदा लम्बी साँस खींचते और आहें भरते रहते हैं। इन्हें रातभर कभी नींद नहीं आती ॥ ३९ ॥ लोकानन्यान् समर्थोऽसि स्रष्टुं सर्वांस्तपोबलात् । किमु लोकान्तरगतान् राज्ञो दर्शयितुं सुतान् ॥ ४० ॥ 'आप अपने तपोबलसे इन सब लोकोंकी दूसरी सृष्टि करनेमें समर्थ हैं, फिर लोकान्तरमें गये हुए पुत्रोंको एक बार राजासे मिला देना आपके लिये कौन बड़ी बात है? ॥ ४० ॥ इयं च द्रौपदी कृष्णा हतज्ञातिसुता भृशम् । शोचत्यतीव सर्वासां स्नुषाणां दयिता स्नुषा ॥ ४१ ॥ 'यह द्रुपदकुमारी कृष्णा मुझे अपनी समस्त पुत्र-वधुओंमें सबसे अधिक प्रिय है। इस बेचारीके भाई-बन्धु और पुत्र सभी मारे गये हैं; जिससे यह अत्यन्त शोकमग्न रहा करती है ॥ ४१ ॥ तथा कृष्णस्य भगिनी सुभद्रा भद्रभाषिणी । सौभद्रवधसंतप्ता भृशं शोचति भाविनी ॥ ४२ ॥ 'सदा मंगलमय वचन बोलनेवाली श्रीकृष्णकी बहन भाविनी सुभद्रा सर्वदा अपने पुत्र अभिमन्युके वधसे संतप्त हो निरन्तर शोकमें ही डूबी रहती है ॥ इयं च भूरिश्रवसो भार्या परमसम्मता । भर्तृव्यसनशोकार्ता भृशं शोचति भाविनी ॥ ४३ ॥ यस्यास्तु श्वशुरो धीमान् बाह्लिकः स कुरूद्वहः । निहतः सोमदत्तश्च पित्रा सह महारणे ॥ ४४ ॥ 'ये भूरिश्रवाकी परम प्यारी पत्नी बैठी है, जो पतिकी मृत्युके शोकसे व्याकुल हो अत्यन्त दुःखमें मग्न रहती है। इसके बुद्धिमान् श्वशुर कुरुश्रेष्ठ बाह्लिक भी मारे गये हैं।

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व · पृष्ठ 2380, कुल 2566 में से · BharatKosha