महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ
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ततः सुतुमुलः शब्दो जलान्ते जनमेजय । प्रादुरासीद् यथापूर्वं कुरुपाण्डवसेनयोः ॥ ६ ॥ जनमेजय! तदनन्तर जलके भीतरसे कौरवों और पाण्डवोंकी सेनाओंका पहले-जैसा ही भयंकर शब्द प्रकट होने लगा ।। ६ ।। ततस्ते पर्थिवाः सर्वे भीष्मद्रोणपुरोगमाः । ससैन्याः सलिलात् तस्मात् समुत्तस्थुः सहस्रशः ॥ ७ ॥ फिर तो भीष्म-द्रोण आदि समस्त राजा अपनी सेनाओंके साथ सहस्रोंकी संख्यामें उस जलसे बाहर निकलने लगे ।। ७ ।।