महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2529, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंएनं च त्वं विजानीहि भ्रातरं पूर्वजं पितुः ॥ १५ ॥ 'इन मनीषी गन्धर्वराज धृतराष्ट्रका दर्शन करो और इन्हींको अपने पिताका बड़ा भाई समझो ॥ १५ ॥
अयं ते पूर्वजो भ्राता कौन्तेयः पावकद्युतिः । सूतपुत्राग्रजः श्रेष्ठो राधेय इति विश्रुतः ॥ १६ ॥ 'ये रहे तुम्हारे बड़े भाई कुन्तीकुमार कर्ण जो अग्नितुल्य तेजसे प्रकाशित हो रहे हैं। ये ही सूतपुत्रोंके श्रेष्ठ अग्रज थे और ये ही राधापुत्रके नामसे विख्यात हुए थे ॥
आदित्यसहितो याति पश्यैनं पुरुषर्षभम् । 'इन पुरुषप्रवर कर्णका दर्शन करो, ये आदित्योंके साथ जा रहे हैं ॥ १६ १/२ ॥
साध्यानामथ देवानां विश्वेषां मरुतामपि ॥ १७ ॥ गणेषु पश्य राजेन्द्र वृष्ण्यन्धकमहारथान् । सात्यकिप्रमुखान् वीरान् भोजांश्चैव महाबलान् ॥ १८ ॥ 'राजेन्द्र! उधर वृष्णि और अन्धककुलके सात्यकि आदि वीर महारथियों और महान् बलशाली भोजोंको देखो। वे साध्यों, विश्वेदेवों तथा मरुद्गणोंमें विराजमान हैं ॥ १७-१८ ॥
सोमेन सहितं पश्य सौभद्रमपराजितम् । अभिमन्युं महेष्वासं निशाकरसमद्युतिम् ॥ १९ ॥ 'इधर किसीसे परास्त न होनेवाले महाधनुर्धर सुभद्राकुमार अभिमन्युकी ओर दृष्टि डालो। यह चन्द्रमाके साथ इन्हींके समान कान्ति धारण किये बैठा है ॥ १९ ॥
एष पाण्डुर्महेष्वासः कुन्त्या माद्र्या च संगतः । विमानेन सदाभ्येति पिता तव ममान्तिकम् ॥ २० ॥ 'ये महाधनुर्धर राजा पाण्डु हैं जो कुन्ती और माद्री दोनोंके साथ हैं। ये तुम्हारे पिता पाण्डु विमानद्वारा सदा मेरे पास आया करते हैं ॥ २० ॥
वसुभिः सहितं पश्य भीष्मं शान्तनवं नृपम् । द्रोणं बृहस्पतेः पार्श्वे गुरुमेनं निशामय ॥ २१ ॥ 'शान्तनुनन्दन राजा भीष्मका दर्शन करो, ये वसुओंके साथ विराज रहे हैं। द्रोणाचार्य बृहस्पतिके साथ हैं। अपने इन गुरुदेवको अच्छी तरह देख लो ॥ २१ ॥
एते चान्ये महीपाला योधास्तव च पाण्डव । गन्धर्वसहिता यान्ति यक्षपुण्यजनैस्तथा ॥ २२ ॥ 'पाण्डुनन्दन! ये तुम्हारे पक्षके दूसरे भूपाल योद्धा गन्धर्वों, यक्षों तथा पुण्यजनोंके साथ जा रहे हैं ॥ २२ ॥
गुह्यकानां गतिं चापि केचित् प्राप्ता नराधिपाः । त्यक्त्वा देहं जितः स्वर्गः पुण्यवाग्बुद्धिकर्मभिः ॥ २३ ॥