भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

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पृष्ठ 275

अयोनिजानां दान्तानां धर्मज्ञानां सुवर्चसाम् ॥ ६ ॥
अजराणामदुःखानां शतवर्षसहस्रिणाम् ।
लब्धं पुत्रशतं शर्वात् पुरा पाण्डुनृपात्मज ॥ ७ ॥
‘पाण्डुनन्दन! पूर्वकालमें गोकर्णतीर्थमें जाकर मैंने सौ वर्षोंतक तपस्या करके भगवान् शंकरको संतुष्ट किया। इससे भगवान् शंकरकी ओरसे मुझे सौ पुत्र प्राप्त हुए, जो अयोनिज, जितेन्द्रिय, धर्मज्ञ, परम तेजस्वी, जरारहित, दुःखहीन और एक लाख वर्षकी आयुवाले थे’ ॥ ६-७ ॥