महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 41, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंसत्ये तपसि दाने च यस्य नित्यं रतं मनः ॥ ७ ॥ दशाश्वका पुत्र भी बड़ा धर्मात्मा राजा था। उसका मन सदा सत्य, तपस्या और दानमें ही लगा रहता था ॥ मदिराश्व इति ख्यातः पृथिव्यां पृथिवीपतिः । धनुर्वेदे च वेदे च निरतो योऽभवत् सदा ॥ ८ ॥ वह राजा इस भूतलपर मदिराश्वके नामसे विख्यात था और सदा वेद एवं धनुर्वेदके अभ्यासमें संलग्न रहता था ॥ ८ ॥ मदिराश्वस्य पुत्रस्तु द्युतिमान् नाम पार्थिवः । महाभागो महातेजा महासत्त्वो महाबलः ॥ ९ ॥ मदिराश्वका पुत्र महाभाग, महातेजस्वी, महान् धैर्यशाली और महाबली द्युतिमान् नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ ॥ ९ ॥ पुत्रो द्युतिमतस्त्वासीद् राजा परमधार्मिकः । सर्वलोकेषु विख्यातः सुवीरो नाम नामतः ॥ १० ॥ धर्मात्मा कोषवांश्चापि देवराज इवापरः । द्युतिमान्का पुत्र परम धर्मात्मा राजा सुवीर हुआ जो सम्पूर्ण लोकोंमें विख्यात था। वह धर्मात्मा, कोष (धन-भण्डार)-से सम्पन्न तथा दूसरे देवराज इन्द्रके समान पराक्रमी था ॥ १० १/२ ॥ सुवीरस्य तु पुत्रोऽभूत् सर्वसंग्रामदुर्जयः ॥ ११ ॥ स दुर्जय इति ख्यातः सर्वशस्त्रभृतां वरः । सुवीरका पुत्र दुर्जय नामसे विख्यात हुआ। वह सभी संग्रामोंमें शत्रुओंके लिये दुर्जय तथा सम्पूर्ण शस्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ था ॥ ११ १/२ ॥ दुर्जयस्येन्द्रवपुषः पुत्रोऽश्विसदृशद्युतिः ॥ १२ ॥ दुर्योधनो नाम महान् राजा राजर्षिसत्तमः । इन्द्रके समान शरीरवाले राजा दुर्जयके एक पुत्र हुआ जो अश्विनीकुमारोंके समान कान्तिमान् था। उसका नाम था दुर्योधन। वह राजर्षियोंमें श्रेष्ठ महान् राजा था ॥ १२ १/२ ॥ तस्येन्द्रसमवीर्यस्य संग्रामेष्वनिवर्तिनः ॥ १३ ॥ विषये वासवस्तस्य सम्यगेव प्रवर्षति । इन्द्रके समान पराक्रमी और युद्धसे कभी पीछे न हटनेवाले राजा दुर्योधनके राज्यमें इन्द्र सदा ठीक समयपर और उचित मात्रामें ही वर्षा करते थे ॥ १३ १/२ ॥ रत्नैर्धनैश्च पशुभिः सस्यैश्चापि पृथग्विधैः ॥ १४ ॥ नगरं विषयश्चास्य प्रतिपूर्णस्तदाभवत् । उनका नगर और राज्य रत्न, धन, पशु तथा भाँति-भाँतिके धान्योंसे उन दिनों भरा-पूरा रहता था ॥