महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंइस प्रकार वर्णसंकर मनुष्य भी समान जातिकी स्त्रियोंमें अपने ही समान वर्णवाले पुत्रोंकी उत्पत्ति करते हैं और यदि परस्पर विभिन्न जातिकी स्त्रियोंसे उनका संसर्ग होता है तो वे अपनी अपेक्षा भी निन्दनीय संतानोंको ही जन्म देते हैं ।। १६ ।।
यथा शूद्रोऽपि ब्राह्मण्यां जन्तुं बाह्यं प्रसूयते । एवं बाह्यतराद् बाह्यश्चातुर्वर्ण्यात् प्रजायते ।। १७ ।।
जैसे शूद्र ब्राह्मणीके गर्भसे चाण्डाल नामक बाह्य (वर्ण-बहिष्कृत) पुत्र उत्पन्न करता है, उसी प्रकार उस बाह्य जातिका मनुष्य भी ब्राह्मण आदि चारों वर्णोंकी एवं बाह्यतर जातिकी स्त्रियोंके साथ संसर्ग करके अपनी अपेक्षा भी नीच जातिवाला पुत्र पैदा करता है ।। १७ ।।
प्रतिलोमं तु वर्धन्ते बाह्याद् बाह्यतरात् पुनः । हीनाद्धीनाः प्रसूयन्ते वर्णाः पञ्चदशैव तु ।। १८ ।।
इस तरह बाह्य और बाह्यतर जातिकी स्त्रियोंसे समागम करनेपर प्रतिलोम वर्णसंकरोंकी सृष्टि बढ़ती जाती है। क्रमशः हीन-से-हीन जातिके बालक जन्म लेने लगते हैं। इन संकर जातियोंकी संख्या सामान्यतः पंद्रह है ।।
अगम्यागमनाच्चैव जायते वर्णसंकरः । बाह्यानामनुजायन्ते सैरन्ध्रयां मागधेषु च । प्रसाधनोपचारज्ञमदासं दासजीवनम् ।। १९ ।।
अगम्या स्त्रीके साथ समागम करनेपर वर्णसंकर संतानकी उत्पत्ति होती है। मागध जातिकी सैरन्ध्री स्त्रियोंसे यदि बाह्यजातीय पुरुषोंका संसर्ग हो तो उससे जो पुत्र उत्पन्न होता है वह राजा आदि पुरुषोंके शृंगार करने तथा उनके शरीरमें अंगराग लगाने आदिकी सेवाओंका जानकार होता है और दास न होकर भी दासवृत्तिसे जीवन निर्वाह करनेवाला होता है ।। १९ ।।
अतश्चायोगवं सूते वागुराबन्धजीवनम् । मैरेयकं च वैदेहः सम्प्रसूतेऽथ माधुकम् ।। २० ।।
मागधोंके आवान्तर भेद सैरन्ध्र जातिकी स्त्रीसे यदि आयोगव जातिका पुरुष समागम करे तो वह आयोगव जातिका पुत्र उत्पन्न करता है, जो जंगलोंमें जाल बिछाकर पशुओंको फँसानेका काम करके जीवन निर्वाह करता है। उसी जातिकी स्त्रीके साथ यदि वैदेह जातिका पुरुष समागम करता है तो वह मदिरा बनानेवाले मैरेयक जातिके पुत्रको जन्म देता है ।। २० ।।
निषादो मद्गुरं सूते दासं नावोपजीविनम् । मृतपं चापि चाण्डालः श्वपाकमिति विश्रुतम् ।। २१ ।।
निषादके वीर्य और मागधसैरन्ध्रीके गर्भसे मद्गुर जातिका पुरुष उत्पन्न होता है, जिसका दूसरा नाम दास भी है। वह नावसे अपनी जीविका चलाता है। चाण्डाल और