महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 694, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंतपसोऽन्ते महाराज गावो लोकपरायणाः । तस्माद् गावो महाभागाः पवित्रं परमुच्यते ॥ ७ ॥ महाराज! तपस्या समाप्त होनेपर गौएँ सम्पूर्ण जगत्का आश्रय बन गयीं; इसलिये वे महान् सौभाग्यशालिनी गौएँ परम पवित्र बतायी जाती हैं ॥ ७ ॥ तथैव सर्वभूतानां समतिष्ठन्त मूर्धनि । समानवत्सां कपिलां धेनुं दत्त्वा पयस्विनीम् । सुव्रतां वस्त्रसंवीतां ब्रह्मलोके महीयते ॥ ८ ॥ ये समस्त प्राणियोंके मस्तकपर स्थित हैं (अर्थात् सबसे श्रेष्ठ एवं वन्दनीय हैं)। जो मनुष्य दूध देनेवाली सुलक्षणा कपिला गौको वस्त्र ओढ़ाकर कपिल रंगके बछड़ेसहित दान करता है, वह ब्रह्मलोकमें सम्मानित होता है ॥ ८ ॥ लोहितां तुल्यवत्सां तु धेनुं दत्त्वा पयस्विनीम् । सुव्रतां वस्त्रसंवीतां सूर्यलोके महीयते ॥ ९ ॥ जो मनुष्य दूध देनेवाली सुलक्षणा लाल रंगकी गौको वस्त्र ओढ़ाकर लाल रंगके बछड़ेसहित दान करता है, वह सूर्यलोकमें सम्मानित होता है ॥ ९ ॥ समानवत्सां शबलां धेनुं दत्त्वा पयस्विनीम् । सुव्रतां वस्त्रसंवीतां सोमलोके महीयते ॥ १० ॥ जो पुरुष दूध देनेवाली सुलक्षणा चितकबरी गौको वस्त्र ओढ़ाकर चितकबरे बछड़ेसहित दान करता है, वह चन्द्रलोकमें पूजित होता है ॥ १० ॥ समानवत्सां श्वेतां तु धेनुं दत्त्वा पयस्विनीम् । सुव्रतां वस्त्रसंवीतामिन्द्रलोके महीयते ॥ ११ ॥ जो मानव दूध देनेवाली सुलक्षणा श्वेत वर्णकी गौको वस्त्र ओढ़ाकर श्वेत वर्णके बछड़ेसहित दान करता है, उसे इन्द्रलोकमें सम्मान प्राप्त होता है ॥ ११ ॥ समानवत्सां कृष्णां तु धेनुं दत्त्वा पयस्विनीम् । सुव्रतां वस्त्रसंवीतामग्निलोके महीयते ॥ १२ ॥ जो मनुष्य दूध देनेवाली सुलक्षणा कृष्ण वर्णकी गौको वस्त्र ओढ़ाकर कृष्ण वर्णके बछड़ेसहित दान करता है, वह अग्निलोकमें प्रतिष्ठित होता है ॥ १२ ॥ समानवत्सां धूम्रां तु धेनुं दत्त्वा पयस्विनीम् । सुव्रतां वस्त्रसंवीतां याम्यलोके महीयते ॥ १३ ॥ जो पुरुष दूध देनेवाली सुलक्षणा धूएँ-जैसे रंगकी गौको वस्त्र ओढ़ाकर धूएँके समान रंगके बछड़ेसहित दान करता है, वह यमलोकमें सम्मानित होता है ॥ १३ ॥ अपां फेनसवर्णां तु सवत्सां कांस्यदोहनाम् । प्रदाय वस्त्रसंवीतां वारुणं लोकमाप्नुते ॥ १४ ॥