भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 824, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 824

आशीर्वादस्त्वया प्रोक्तः शपथो बलसूदन ।
दीयतां पुष्करं मह्यमेष धर्मः सनातनः ॥ ४६ ॥
अगस्त्यने कहा— बलसूदन! आपने जो शपथ की है, वह तो आशीर्वादस्वरूप है। अतः आपने ही मेरे कमल लिये हैं, कृपया उन्हें मुझे दे दीजिये। यही सनातन धर्म है ॥ ४६ ॥

इन्द्र उवाच

न मया भगवँल्लोभाद्धृतं पुष्करमद्य वै ।
धर्मांस्तु श्रोतुकामेन हृतं न क्रोद्धुमर्हसि ॥ ४७ ॥
इन्द्र बोले— भगवन्! मैंने लोभवश कमलोंको नहीं लिया था। आपलोगोंके मुखसे धर्मकी बातें सुनना चाहता था, इसीलिये इन कमलोंका अपहरण कर लिया था। अतः मुझपर क्रोध न कीजियेगा ॥ ४७ ॥

धर्मश्रुतिसमुत्कर्षो धर्मसेतुरनामयः ।
आर्षो वै शाश्वतो नित्यमव्ययोऽयं मया श्रुतः ॥ ४८ ॥