भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 936, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 936

ऐश्वर्यको देखकर जलनेवाले कितने ही शत्रु उनमें मतभेद पैदा करनेकी इच्छा करने लगते हैं॥ ५ ॥

ज्येष्ठः कुलं वर्धयति विनाशयति वा पुनः। हन्ति सर्वमपि ज्येष्ठः कुलं यत्रावजायते ॥ ६ ॥ जेठा भाई अपनी अच्छी नीतिसे कुलको उन्नतिशील बनाता है; किंतु यदि वह कुनीतिका आश्रय लेता है तो उसे विनाशके गर्तमें डाल देता है! जहाँ बड़े भाईका विचार खोटा हुआ, वहाँ वह जिसमें उत्पन्न हुआ है, अपने उस समस्त कुलको ही चौपट कर देता है॥ ६ ॥

अथ यो विनिकुर्वीत ज्येष्ठो भ्राता यवीयसः। अज्येष्ठः स्यादभागश्च नियम्यो राजभिश्च सः ॥ ७ ॥ जो बड़ा भाई होकर छोटे भाइयोंके साथ कुटिलतापूर्ण बर्ताव करता है, वह न तो ज्येष्ठ कहलाने योग्य है और न ज्येष्ठांश पानेका ही अधिकारी है। उसे तो राजाओंके द्वारा दण्ड मिलना चाहिये॥ ७ ॥

निकृती हि नरो लोकान् पापान् गच्छत्यसंशयम्। विदुलस्येव तत् पुष्पं मोघं जनयितुः स्मृतम् ॥ ८ ॥ कपट करनेवाला मनुष्य निःसंदेह पापमय लोकों (नरक)-में जाता है। उसका जन्म पिताके लिये बेतके फूलकी भाँति निरर्थक ही माना गया है॥ ८ ॥

सर्वानर्थः कुले यत्र जायते पापपूरुषः। अकीर्तिं जनयत्येव कीर्तिमन्तर्दधाति च ॥ ९ ॥ जिस कुलमें पापी पुरुष जन्म लेता है, उसके लिये वह सम्पूर्ण अनर्थोंका कारण बन जाता है। पापात्मा मनुष्य कुलमें कलंक लगाता और उसके सुयशका नाश करता है॥ ९ ॥

सर्वे चापि विकर्मस्था भागं नार्हन्ति सोदराः। नाप्रदाय कनिष्ठेभ्यो ज्येष्ठः कुर्वीत यौतकम् ॥ १० ॥ यदि छोटे भाई भी पापकर्ममें लगे रहते हों तो वे पैतृक धनका भाग पानेके अधिकारी नहीं हैं। छोटे भाइयोंको उनका उचित भाग दिये बिना बड़े भाईको पैतृक-सम्पत्तिका भाग ग्रहण नहीं करना चाहिये॥ १० ॥

अनुपघ्नन् पितुर्दायं जङ्घाश्रमफलोऽध्वगः। स्वयमीहितलब्धं तु नाकामौ दातुमर्हति ॥ ११ ॥ यदि बड़ा भाई पैतृक धनको हानि पहुँचाये बिना ही केवल जाँघोंके परिश्रमसे परदेशमें जाकर धन पैदा करे तो वह उसके निजी परिश्रमकी कमाई है। अतः यदि उसकी इच्छा न हो तो वह उस धनमेंसे भाइयोंको नहीं दे सकता है॥ ११ ॥

भ्रातॄणामविभक्तानामुत्थानमपि चेत् सह।