महानिर्वाण तन्त्र (हिन्दी अनुवाद सहित)
Mahanirvana Tantra with Hindi Translation
शिव-पार्वती संवाद द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर · कल्याण मन्दिर · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंवन्दे गुरोर्मण्डलम् हे शिवे! तुम साक्षात् परम ब्रह्म की परमा प्रकृति अर्थात् शक्ति हो। यह सारा जगत् तुम्हीं से उत्पन्न हुआ है। हे भद्रे! महत् तत्त्व से परमाणु तक और स्थूल-सूक्ष्म सारा स्थावर- जङ्गम-स्वरूप जगत् तुम्हारे ही द्वारा उत्पन्न हुआ है। सारा जगत् तुम्हारे अधीन है। तुम सबकी आद्या अर्थात् आदि-भूता हो। सारी विद्याएँ और हम सब तुम्हीं से उत्पन्न हुए हैं। सारे जगत् के सभी विषयों को तुम जानती हो। तुम्हें कोई नहीं जान सकता। तुम काली हो, तुम तारिणी हो, तुम दुर्गा हो, तुम षोडशी हो, तुम भुवनेश्वरी हो, तुम धूमावती हो, तुम बगला हो, तुम भैरवी हो, तुम छिन्न- मस्ता हो। महा-निर्वाण तन्त्र प्रकाशक : परा-वाणी आध्यात्मिक शोध-संस्थान श्रीचण्डी-धाम, अलोपी-देवी मार्ग, प्रयाग-२११००६