भारतकोश
मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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खड़े में गिर पड़ता है। खड़ा ज्यादा गहरा नहीं होता है। 10-12 दिन वहाँ रहने दिया जाता है उसे। ऐसे में कमजोर हो जाता है। फिर पेड़ के साथ रस्सी के सहारे से महावत नीचे जाता है। पीछे कुछ रस्सी को पकड़े रखते हैं। वो हाथी को धीरे-धीरे पुचकारता है। उसे रोटी भी देता है। हाथी मान जाता है कि यह भला करने के लिए आया। नहीं, भला नहीं करने आया। इसी तरह से निरंजन अवतार धारण करके आता है तो दुनिया सोचती है कि यही परमात्मा है, हमें बचाने आया है। तो धीरे-धीरे हाथी को पालतू बना देते हैं। फिर उसे खड़े में से बाहर निकालते हैं। क्यों? हाथी को क्यों पकड़ा? एक दिन मैं असाम साइड में जा रहा था तो देखा कि हाथी रेल के डिब्बे में लकड़ी चढ़ा रहे थे। बड़ा काम करते हैं हाथी। बड़ा बुद्धिमान भी है हाथी। सूँढ़ से धकेल रहे थे। फिर सूँढ़ से धकेलकर ऊपर कर रहे थे। फिर क्या कराते हैं हाथी से? एक कहावत भी है कि जिंदा हाथी लाख का और मरा सवा लाख का। पर आजकल एक लाख से कुछ नहीं बनता है। मैं रखबंधू की चारदीवारी करवा रहा था तो 20 लाख की चारदीवारी बनाई। छोटे आश्रम की चारदीवारी में 5-6 लाख लग जाते हैं। तो हाथी जिंदा लाख का; मरा तो सवा लाख का। पर आजकल 5-6 लाख है हाथी की कीमत। मेरे पास महा घटिया लोग भी आते हैं और राजे लोग भी आते हैं। अभी काफ़ी बुद्धिजीवी मेरे पास आ रहे हैं। एक हाथी का व्यापारी आया। उसने कहा कि यदि आपकी आज्ञा हो तो आपके लिए हाथी लाऊँ? मैंने पूछा कि हाथी के व्यापारी हो क्या? कहा—हाँ। आसाम से लाकर यहाँ पर बेचता हूँ।

अमृतसर में घोड़े बिकते हैं। वहाँ घोड़ा-मण्डी है। अच्छे लंबे-चौड़े घोड़े हैं। पहले यहाँ पंजाब से आते थे पशु, पर अब यहाँ से पंजाब में जा रहे हैं। इस तरह अन्य पशुओं की तरह हाथी की भी बिक्री होती है। हाथियों से बड़े काम लिये जाते हैं। पहले तो राजा लोग सवारी भी करते थे। आजकल झांकियों आदि में, भीख माँगने आदि के लिए हाथी का इस्तेमाल करते हैं। मंदिरों, देवस्थानों आदि में हाथियों का प्रयोग