भारतकोश
मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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मन का स्वरूप


मन सारी दुनिया को कठपुतली का नाच नचाया करता है। मन ही साहिब की सब निर्मल आत्माओं को बहुत लम्बे समय से शरीर रूपी पिंजड़े में भ्रमित किये हुए है। यही श्रद्धालुओं और सच्चाई की खोज करने वालों को आदिकाल से भटकाए हुए हैं; अतः आत्मा के कल्याण के लिए, इसे बन्धन से छुड़ाने के लिए हमें सर्वप्रथम मन के स्वरूप को जानना होगा।

विभिन्न पंथों, सम्प्रदायों और धर्मों से सम्बन्धित धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करने और उनके प्रचारकों और श्रद्धालुओं से वार्तालाप करने से पता चलता है कि कुछ पंथ और सम्प्रदाय ‘मन क्या है?’ प्रश्न के विषय में खामोश हैं। वे केवल इतना मानते हैं कि मन बहुत अद्भुत शक्ति का भण्डार है। यह काबू में नहीं आता। इसके विपरीत कुछ पंथों तथा सम्प्रदायों ने इस प्रश्न पर अपने-अपने ढंग से रोशनी डाली है, जिससे उनके विचारों में भिन्नता आ गई है।

आखिर ‘मन क्या है’ यह एक गम्भीर विषय बन जाता है। इस विषय में जो कुछ विचार प्रकट हुए हैं, वे इस प्रकार हैं।

कुछ विचारकों के मत में मन और आत्मा एक ही चीज़ हैं। वे एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इन दोनों में कोई भी अन्तर नहीं। यह मन आत्मा की संकल्प- शक्ति है। वे यह तर्क देते हैं कि अगर मन आत्मा से भिन्न माना जाए तो फिर इसे शरीर का अंग मानना पड़ेगा और इन