भारतकोश
मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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काम करना। गुस्से का मिनीस्टर है—क्रोध। संदेश दिया। उकसाना ज़रूरी था वहाँ। नहीं आता क्रोध तो नहीं मारना था। इनका कोई कसूर नहीं है। पुलिस वालों को आदेश मिला कि मारो तो उनका कसूर नहीं है, आदेश का पालन कर रहे हैं। इस तरह इनका कसूर नहीं है। इन्होंने आदेश माना। इसके भी एस.पी. हैं। इन्द्रियों पर देवता हैं; सब इसकी बात मान रहे हैं। मन ने कहा कि आम खाना है। हरेक बात का पालन होता है। मन ने कहा कि धन चाहिए। क्या कर रहा है? बॉस है, किनारे बैठकर नेटवर्क चला रहा है। माफिया है।

जीव के संग मन काल रहाई। अज्ञानी नर जानत नाहीं ॥

धन चाहिए। ऐसे नहीं आयेगा। बुद्धि ने लोभ को कहा—हाय पैसा, हाय पैसा। दिल में समा जायेगा। सरकार ने कहा कि फ़लाना काम करना है। सभी जुट जाते हैं कार्यकता। बुद्धि एक बार आदेश दे दे कि चाँटा मारना है, हाथ तैयार हो जायेंगे। यह काम हो जायेगा। पाँच चीज़ें विशिष्ट हैं। पाँचों इसमें बड़े मंत्री हैं। इनके सैकेट्री हैं, पूरा परिवार है। जो कहा, वो करना-ही-करना है, नहीं तो शांति नहीं है। चाहे-अनचाहे करना ही है, क्योंकि मन का आदेश है।

मोह आया। मोह का मिनीस्टर ब्रेन में बैठेगा, कहेगा कि बेटे के लिए यह कर, वो कर। आदमी सोचता है कि तारे तोड़ लाऊँ। मिनीस्टरों ने कार्यकर्ताओं को अधिकार दे रखे हैं। इस तरह इनके पास हथियार हैं, दिख नहीं रहे हैं।

मन जो चाहता है, वो करता है। यही दुश्मन बना देता है। इसकी तह में जायेंगे तो यह सेना बहुत है। मन की सेना बड़ी तगड़ी है।

जैसे सैकेट्री हैं, तहसीलदार हैं, कमीशनर हैं, थाना है, चौकियाँ हैं, फिर बाजारों में सिपाही खड़े हैं। पूरे एरिए को पकड़ा है। इस तरह मन तीन-लोक का राजा जो है। यह इसे सही में मिला है। पॉवर मिला है। काम, क्रोध आदि भी इसी के हैं।

मन का हर एक आदेश पालन किया जाता है। जो भी चाहता है,