मनहिं निरंजन सबै नचाए
Manhin Niranjan Sabai Nachaye
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअष्टदल कमल पर मन धाए
हरेक इंसान के अन्दर काल-पुरुष का एक नेटवर्क है। आपका चिंतन आपका नहीं है। हरेक इंसान के अन्दर मन के आठ बैंड हैं, अष्टदल कमल हैं। हृदय में आठ कोष्ठक हैं। वहाँ पर बीच में मन रहता है। एक बार किसी ने कहा कि बड़ी उदासी है। कहा कि कारण नहीं जान पा रही हूँ। कहा कि कोई ऐसी घटना भी नहीं हुई है, पर फिर भी बड़ी उदास हूँ। कहा कि कारण पता नहीं चल रहा है। कहा कि किसी से बात करने की इच्छा भी नहीं हो रही है। मैंने कहा कि कारण है। यह हृदय के अष्ट कोष्ठक हैं। इनके बीच में मन रहता है।
उत्तर दल पर जब मन जाई। दया धर्म तब उर में आई॥
जितनी देर मन वहाँ बैठेगा, आदमी को भक्ति-भाव हृदय में आयेगा। यह खुद-ब-खुद होगा। इसका मतलब है कि इंसान का चिंतन भी अपना नहीं है; अपना स्वभाव भी नहीं है। बहुत ताकतवर चीजें अन्दर में बैठकर के अपना काम कर रही हैं। उतनी देर आपमें वही विचार रहेंगे। ये विचार क्यों उत्पन्न हुए? आदमी नहीं जान पा रहा है।
दक्षिण दल पर जब मन जाता। महालोभ तब उर में आता॥
दक्षिण के कोष्ठक में जब मन जाकर के बैठेगा, बड़ा गुस्सा आयेगा; बिना मतलब की बातों पर गुस्सा आयेगा। स्वभाव तेज़ रहेगा; लड़ाई करने की इच्छा होगी। अच्छा या बुरा स्वभाव आत्मा का नहीं है। यह सब मन का खेल है। आप किसी से झगड़ा कर बैठेंगे। आपका स्वभाव उखड़ा होगा। आपमें बहुत क्रोध होगा उस समय।
कई आदमी ऐसी अवस्था में कहते हैं कि भाई, अभी मेरा मूड