भारतकोश
मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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भी पड़ते होंगे बैल को। वो रस्सों से बाँधा रहता है। इसी तरह आत्मा को भी एक मतलब के लिए मन ने बाँधा हुआ है। इस पर साहिब कह रहे हैं—

सध्याद के काबू में हैं सब जीव बेचारे॥

कह रहे हैं कि दुनिया के सब जीव एक शैतानी ताकत के हाथ में हैं। एक गीत सुना है—

जिंदगी क्या है, गम का दरिया है।
ना जीना यहाँ बस में, ना मरना यहाँ बस में॥

कुछ लोग हैं कि जीना नहीं चाहते हैं, पर जीना पड़ता है। कुछ लोग हैं कि जीना चाहते हैं, पर मरना पड़ता है। इसका मतलब है कि सब किसी शैतानी ताकत के हाथ में नाच रहे हैं। पर विडंबना यह है कि सभी उस शैतानी ताकत को परमात्मा की संज्ञा दे रहे हैं। तभी तो साहिब कह रहे हैं—

जो रक्षक तहँ चीहनत नाहीं, जो भक्षक तहँ ध्यान लगाहीं॥

साहिब ने बड़ी क्रांति लाई। जो अपना है, जिसकी सुरति करनी चाहिए, जिसकी भक्ति करनी चाहिए, उसकी कोई नहीं कर रहा है। जो भक्षक है, जो वैरी है, सब उसी की सुरति कर रहे हैं, सब उसी की भक्ति कर रहे हैं।

साहिब ने पूरे समीकरण बदल दिये। कह रहे हैं—

गण गंधर्व ऋषि मुनि अरु देवा, सब मिल लाग मनहिं की सेवा॥

यानी परमात्मा की सेवा में कोई नहीं लगा है। सब किसी शैतानी ताकत, जिसे मन कहा जाता है, को माने जा रहे हैं।

जस नट मरकट को दुख देई। नाना नाच नचावन लेई॥

जैसे बंदर बाजीगर के इशारों पर नाचता है, यह आत्मदेव भी दुनिया में ऐसे ही काम कर रहा है।

कुछ ने बाजीगर का खेल देखा होगा। मैंने भी देखा। मैं छोटेपन से ही बड़ों के साथ बैठता था, बच्चों के साथ नहीं, क्योंकि उनकी शरारतें