मनहिं निरंजन सबै नचाए
Manhin Niranjan Sabai Nachaye
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंव्यवधान कर रहा है। और जब मुझे बहाया जाने लगा तो मैं एक ही वस्तु को पकड़े रहा—नाम को। तो मैं बहा नहीं। मैं अब एकाग्र होने लगा। धीरे धीरे मुझे अनुभव होने लगा। अब डिस्टर्ब जिन जिन चीजों से हो रहा है, साफ नजर आ रहा है। लेकिन अभी भी मुझे दिखाई नहीं दे रहा है। मैं स्मरण में ही रहा। मुझे जो व्यवधान आ रहा है, वो नजर आ रहा है। अभी भी व्यवधान कौन कर रहा है, यह नजर नहीं आ रहा है। मैं और कन्संट्रेट हुआ। मैं सब तरफ से सब काम छोड़कर भजन करने लगा, क्योंकि मेरे लिए एक ही चीज थी कि मुझे रुकावट कौन दे रहा है। मुझे देखना यही था। अब मैंने देखा, मुझे खाना-पीना भी डिस्टर्ब दे रहा था। मैंने कहा, छोड़ो खाने को। मैंने पक्का संकल्प किया कि जब मैं आत्मरूप हूँ तो खाना क्यों खाऊँ। मैं एकाग्र हुआ। अब मैं तो भोजन खाना नहीं चाह रहा हूँ, कोई मुझे प्रेरणा दे रहा है, अन्दर से कि खाना खाओ। मैं एकदम चेतन हुआ, मैं खाना नहीं खाना चाहता हूँ, कौन मुझे प्रेरणा दे रहा है। मैं पूरी तरह से कन्संट्रेट हुआ.....खाना नहीं खाना है। अब मुझे यूँ लगने लगा जैसे कोई कह रहा है—खाना खाओ। आपसे भी यूँ ही कहा जा रहा है। पर आप लैंगवेज पढ़ नहीं पा रहे हैं। मैंने कहा—नहीं, मैं खाना नहीं खाऊँगा, क्योंकि मैं शरीर नहीं हूँ। यह पूर्ण सच है कि मैं आत्मा हूँ, शरीर नहीं हूँ। खाना नहीं खाऊँगा। अब मैंने कहा कि आत्मा सोती जागती भी नहीं है। मैं जागरूक हो गया—सोऊँगा नहीं। मुझे कोई प्रेरणा दे रहा है, सो जाओ, वरना कमजोर हो जाओगे। मैंने कहा, यह तो मेरी सोच नहीं है कि सो जाओ वरना कमजोर हो जाओगे। यह कौन सोचवा रहा है। मैं और एकाग्र होने लगा। मैंने सोना भी छोड़ दिया, खाना भी छोड़ दिया और कर क्या रहा हूँ—स्मरण। अब तक एक भी श्वास मैं नहीं छोड़ना चाहता हूँ और मैं सुष्मना में आ गया। अब छः महीने जब मैं लगातार इस अवस्था में रहा तो मुझे आदेश देने वाला नजर आने लगा। मैंने कहा—तुम थे। इतने पीछे रहते हो....इतनी गहराई में। अब आमने सामने आदेश देने वाला मुझे नजर आ रहा था कि किस तरह बोलता है, किस बिंदू पर बैठा है। अब उसे कोई भी हरकत नहीं