मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१० मनुस्मृति । शाख्यमुग्र, कापोल, महाकापोल, लाङ्गलिक, शार्दूल और कौथुम। कौथुमों के ये शाखाभेद हैं-आसुरायण, वातायन, प्राञ्ज, बैनधृत, प्राचीनयोग्य और नैतेय । छन्द, आरण्य, माहानाम्न और उत्तर-ये चार आर्चिक ग्रन्थ । स्तोभग्रन्थ एक । गेय, आरण्य, ऊह और ऊह्य ये चार प्रधान ग्रन्थ । माहानाम्न, भारण्ड, तवश्यायनीय और गायत्र-ये चार परिशिष्टग्रन्थ । इस प्रकार आठ ग्रन्थ गान के और छन्द आदि पांच ग्रन्थ पहले के मिलकर तेरह ग्रन्थ संहिता नाम से कहेजाते हैं। ताण्ड्य, षड्विंश, सामविधान, आर्षेय, देवताध्याय, उपनिषद्, संहितोपनिषद् और वंश, ये आठ ब्राह्मण ग्रन्थ हैं। इनका साधारण नाम छान्दोग्य ब्राह्मण है। ४ । अथर्ववेद के शाखाभेद । अथर्ववेद की नौ शाखा थीं यह व्याकरण-महाभाष्य में लिखा है। वे ये हैं-पैप्पलाद, शौनकीय, दामोद, तोतायन, जायन, ब्रह्मपलाश, कुनखी, देवदर्शी और चारणविद्य । अथर्ववेद की शौनकसंहिता और गोपथब्राह्मण प्रसिद्ध हैं। वेदों के षडङ्ग । वेदों के शिक्षाआदि छः अङ्ग हैं। जैसे अङ्ग अङ्गी के उपकारक होते हैं इसी प्रकार वेद के शिक्षा आदि उपकारक होने से अङ्ग कहलाते हैं। १ । शिक्षा । सर्वसाधारण पाणिनीय-शिक्षा है । और याज्ञवल्क्य