मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभूमिका । १२५ अध्वर्यु आदि किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं है किन्तु ऋत्विजों की उपाधि (पदवी) है; इसी प्रकार मनु (स्वायं- भुव-वैवस्वत आदि) भी किसी एक व्यक्ति की संज्ञा नहीं है किंतु ब्रह्मा के दिन में एकहत्तर महायुगपर्यन्त प्रजापालन करनेवाले अधिकारी की पदवी है। प्रमाणवचन- 'न वैतच्छ्रुतिसामान्यमात्रं नित्येऽपि संभवात् । यज्ञेऽध्वर्युरिव ह्यस्ति मनुर्मन्वन्तरे सदा ॥ प्रतिमन्वन्तरं चैवं श्रुतिरन्या विधीयते । स्थिताश्च मनवो नित्यं कल्पे कल्पे चतुर्दश ॥ तेन तद्वाक्यचेष्टानां सर्वदैवास्ति संभवः । तदुक्तिज्ञापनाद् वेदो नानित्योऽतो भविष्यति ॥ प्रतियज्ञं भवन्त्यन्ये षोडश षोडशर्त्विजः । आदिमत्त्वं च वेदस्य न तच्चरितबन्धनात् ॥' इत्यादि ।