मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 166, कुल 649 में से
संदर्भ में पढ़ें२६ मनुस्मृति । अलग अलग यज्ञकर्म किया जाता है। गर्भाधान से लेकर अन्त्येष्टि तक जिस वर्ण (द्विजाति) के लिए वेदमन्त्रों से कर्म लिखे हैं उसी का इस शास्त्र को पढ़ने सुनने का अधिकार है दूसरों का नहीं है ॥ १३-१६ ॥ सरस्वतीदृषद्वत्योर्देवनद्योर्यदन्तरम् । तं देवनिर्मितं देशं ब्रह्मावर्तं प्रचक्षते ॥ १७ ॥ तस्मिन् देशे य आचारः पारम्पर्यक्रमागतः । वर्णानां सान्तरालानां स सदाचार उच्यते ॥ १८ ॥ देशविभाग । सरस्वती और दृषद्वती इन देवनदियों के बीच जो देश है उस को 'ब्रह्मावर्त' कहते हैं‡ जिस देशमें, परंपरा से, जो आचार चला आता है, वही वर्णों का और सङ्कीर्ण जातियों का 'सदाचार' कहा जाता है ॥ १७-१८ ॥ कुरुक्षेत्रं च मत्स्याश्च पञ्चालाः शूरसेनकाः । एष ब्रह्मर्षिदेशो वै ब्रह्मावर्तादनन्तरः ॥ १६ ॥ एतद्देशप्रसूतस्य सकाशादग्रजन्मनः । स्वं स्वं चरित्रं शिक्षेरन् पृथिव्यां सर्वमानवाः ॥ २० ॥ हिमवद्विन्ध्ययोर्मध्यं यत्प्राग्विनशनादपि । प्रत्यगेव प्रयागाच्च मध्यदेशः प्रकीर्तितः ॥ २१ ॥ आसमुद्रात्तु वै पूर्वादासमुद्रात्तु पश्चिमात् । तयोरेवान्तरं गिर्योरार्यावर्त्तं विदुर्बुधाः ॥ २२ ॥ ‡ महाभारत में लिखा है-शुतुद्रि और यमुना के मध्यगत 'लक्षप्रस्रवण' नामक पर्वत से 'सरस्वती' नदी की उत्पत्ति है । कुरुक्षेत्र की उत्तर सीमा में, इसका प्रवाह प्रायः वर्षा में देखा जाता है । ऋग्वेद में भी 'इमं मे गङ्गे यमुने सरस्वति शुतुद्रि...'* इत्यादि वर्णन है । और दृषद्वती नदी, हास्तिनपुर के पश्चिम-उत्तर दिशा में, अम्बाला के पास कहीं नदियों में मिली है । इन दोनों के बीच में, प्राचीन आर्य ब्राह्मणों के निवास और उत्पत्ति से 'ब्रह्मावर्त' नाम प्रसिद्ध हुआ ।