मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 207, कुल 649 में से
संदर्भ में पढ़ेंतीसरा अध्याय। ६७ आज्ञा से, स्नान, समावर्तन करने के बाद, अपने वर्ण की शुभ- लक्षणवाली कन्या से विवाह करे। जो माता की सपिण्ड-सात पीढ़ी में न हो और पिता के गोत्र में न हो, ऐसी कन्या द्विजों के लिये विवाह योग्य होती है। यदि गौ, बकरी, भेड़, धन और धान्य से खूब धनी भी हो तौभी विवाहसम्बन्ध जातकर्मसंस्कार-रहित, कन्यामात्र पैदा करनेवाला, वेदपाठनरहित, शरीर में बहुत बाल- वाला, बवासीरवाला, क्षयरोगी, मन्दाग्नि, मृगी, श्वेतकुष्ठ, और गलितकुष्ठ इन दश कुलों में न करना चाहिये ॥ १-७ ॥ नोद्वहेत्कपिलां कन्यां नाधिकाङ्गीं न रोगिणीम् । नालोमिकां नातिलोमां न वाचाटां न पिङ्गलाम् ॥ ८ ॥ नर्क्षवृक्षनदीनाम्नीं नान्त्यपर्वतनामिकाम् । न पक्ष्यहिप्रेष्यनाम्नीं न च भीषणनामिकाम् ॥ ६ ॥ अव्यङ्गाङ्गीं सौम्यनाम्नीं हंसवारणगामिनीम् । तनुलोमकेशदशनां मृद्वङ्गीमुद्वहेत्स्त्रियम् ॥ १० ॥ यस्यास्तु न भवेद् भ्राता न विज्ञायेत वा पिता । नोपयच्छेत तां प्राज्ञः पुत्रिकाधर्मशङ्कया ॥ ११ ॥ विवाह-नियम । जिसके देह में लाल बाल हों, अधिक अङ्गवाली, रोगी, बिना बालवाली, अधिक बालवाली, ज्यादा बोलनेवाली और पीली आँखोंवाली कन्या से विवाह न करे। नक्षत्र, वृक्ष, नदी, म्लेच्छ, पर्वत, पक्षी, साँप और शूद्र नामवाली और भयदायक नामवाली के साथ विवाह न करे। सुन्दर अङ्गवाली, सुन्दर नामवाली, हंस और हाथी के समान चालवाली, पतले रोम, बाल और दांत- वाली, कोमल शरीरवाली कन्या के साथ विवाह करना चाहिये। जिसका भाई न हो, जिसके पिता का पता मालूम न हो, ऐसी कन्या के साथ 'पुत्रिकाधर्म' से डरकर विवाह न करना चाहिये ॥ ८-११ ॥