भारतकोश
मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

महर्षि मनु द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished649 पृष्ठ

पृष्ठ 348, कुल 649 में से

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पृष्ठ 348

२०८ मनुस्मृति । नुसार इस जगत् की रक्षा करनी चाहिए। इस जगत् में जब राजा नहीं था और प्रजा भय से व्याकुल होने लगी, तब परमात्मा ने जगत् की रक्षा के लिए राजा को उत्पन्न किया। इन्द्र, वायु, यम, सूर्य, अग्नि, वरुण, चन्द्रमा और कुबेर इन आठ लोकपालों के सनातन अंश को लेकर परमात्मा ने राजा बनाया है। इन लोकपालों की मात्रा से राजा बनाया गया है, इसलिए वह अपने तेज से सब प्रा- णियों को दबा देता है। राजा को जो देखता है उसके आँख और मन पर सूर्य का सा प्रभाव पड़ता है, इसलिए सामने होकर कोई राजा को देख नहीं सकता। राजा अपने प्रभाव में अग्नि, सूर्य, चन्द्रमा, यम, कुबेर, वरुण और इन्द्र के समान है॥३-७॥ बालोऽपि नावमन्तव्यो मनुष्य इति भूमिपः । महती देवता ह्येषा नररूपेण तिष्ठति ॥ ८ ॥ एकमेव दहत्यग्निर्नरं दुरुपसर्पिणम् । कुलं दहति राजाग्निः सपशुद्रव्यसञ्चयम् ॥ ९ ॥ कार्यं सोऽवेक्ष्य शक्तिं च देशकालौ च तत्त्वतः । कुरुते धर्मसिद्ध्यर्थं विश्वरूपं पुनः पुनः ॥ १० ॥ यस्य प्रसादे पद्मा श्रीर्विजयश्च पराक्रमे । मृत्युश्च वसति क्रोधे सर्वतेजमयो हि सः ॥ ११ ॥ तं यस्तु द्वेष्टि संमोहात्स विनश्यत्यसंशयम् । तस्य ह्याशु विनाशाय राजा प्रकुरुते मनः ॥ १२ ॥ राजा बालक हो तो भी यह मनुष्य है ऐसा मानकर उसका अपमान न करे। क्योंकि—यह मनुष्य रूप में बड़ाभारी देवता स्थित है। अग्नि एकही मनुष्य को उसकी असावधानी से जलाता है, पर राजारूप अग्नि कुचाल से कुल, धन और पशु सहित भस्म कर देता है। राजा देश, काल, कार्य और शक्ति को