भारतकोश
मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

महर्षि मनु द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished649 पृष्ठ

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भूमिका । ३६ अनन्तर ही पूर्वकाल में आयुर्वेद, धनुर्वेद, गन्धर्ववेद, अथर्व वेद की शिक्षा प्राप्त की जाती थी ) इनमें भी पञ्चमहायज्ञ गृहस्थ का नित्यकर्म है, जिसके बारे में भगवान् मनु ने तृतीय अध्याय में बहुत कुछ लिखा है । अष्टकादि आश्वयुजीपर्यन्त सात स्मार्तकर्म पाकनिष्ठ हैं, अग्न्याधानादि सौत्रामणीपर्यन्त सात श्रौतकर्म हविपनिष्ठ हैं और अग्निष्टोमादि आप्तोर्याम- पर्यन्त सात श्रौतकर्म सोम ( पूतिका ) निष्ठ हैं । उक्त चालीस संस्कारों के अलावा ये आठ आत्मगुण हैं—१ दया, २ क्षान्ति, ३ अनसूया, ४ शौच, ५ अनायास, ६ माङ्गल्य, ७ अकार्पण्य, ८ अस्पृहा । आन्तरक्रिया साध्य होने से इनका भी उल्लेख संस्कारप्रकरण में किया है । ' गर्भाधानं पुंसवनं सीमन्तोन्नयनं जातकर्म नामकरणान्न- प्राशनचौलोपनयनं चत्वारि वेदव्रतानि स्नानं सहधर्मचारिणी- संयोगः पञ्चानां यज्ञानामनुष्ठानमष्टका पार्वणं श्राद्धं श्रावण्या- ग्रहायणी चैत्र्याश्वयुजीति सप्त पाकसंस्थाः अग्न्याधानमग्नि- होत्रं दर्शपूर्णमासौ चातुर्मास्यान्याग्रयणेष्टिर्निरूढपशुबन्धः सौत्रामणीति सप्त हविर्यज्ञसंस्थाः अग्निष्टोमोऽत्यग्निष्टोम उक्थः षोडशी वाजपेयोऽतिरात्र आप्तोर्याम इति सप्त सोमसंस्था इत्येते चत्वारिंशत्संस्काराः । अष्टावात्मगुणा दया सर्वभूतेषु क्षान्ति- रनसूया शौचमनायासो माङ्गल्यमकार्पण्यमस्पृहेति ॥ , ' गौतम । ' सर्वथापि-३ । ४ । ३४ । ' इस ब्रह्मसूत्र के शारीरक व्याख्यानुसार ' १ निरशनसंहिताध्ययन, २ प्रायणकर्म, १ वर्तमानकालिक मनुष्यशिक्षा का वर्णन ' चातुर्वर्ण्यशिक्षा ' में देखो ।