भारतकोश
मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

महर्षि मनु द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished649 पृष्ठ

पृष्ठ 518, कुल 649 में से

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३७८ मनुस्मृति । हैं। द्विजों के नीचे जाति की स्त्री में माता के दोष से उत्पन्न पुत्र 'अनन्तर' कहलाते हैं। ब्राह्मण से उग्र की कन्या में आवृत जाति का अम्बष्ठकन्या में आभीर जाति का और आयोगवी में धिग्बण जाति का पुत्र कहलाता है ॥ १३-१५ ॥ आयोगवश्च क्षत्ता च चाण्डालश्चाधमो नृणाम् । प्रातिलोम्येन जायन्ते शूद्रादपसदास्त्रयः ॥ १६ ॥ वैश्यान्मागधवैदेहौ क्षत्रियात्सूत एव तु । प्रतीपमेते जायन्ते परेऽप्यपसदास्त्रयः ॥ १७ ॥ जातो निषादाच्छूद्रायां जात्या भवति पुक्कसः । शूद्राज्जातो निषाद्यां तु स वै कुक्कुटकः स्मृतः ॥ १८ ॥ क्षत्तृर्जातस्तथोग्रायां श्वपाक इति कीर्त्यते । वैदेहकेन त्वम्बष्ठायामुत्पन्नो वेण उच्यते ॥ १६ ॥ द्विजातयः सवर्णासु जनयन्त्यव्रतांस्तु यान् । तान् सावित्री परिभ्रष्टान् व्रात्यानिति विनिर्दिशेत् ॥ २० ॥ व्रात्यात्तु जायते विप्रात्पापात्मा भूर्जकण्टकः । आवन्त्यवाटधानौ च पुष्पधः शैख एव च ॥ २१ ॥ झल्लो मल्लश्च राजन्याद्व्रात्यान्निच्छिविरेव च । नटश्च करणश्चैव खसो द्रविड एव च ॥ २२ ॥ वैश्यात्तु जायते व्रात्यात्सुधन्वाचार्य एव च । कारुषश्च विजन्मा च मैत्रः सात्वत एव च ॥ २३ ॥ आयोगव, क्षत्ता और चाण्डाल ये शूद्र से प्रतिलोमभाव से पैदा तीन मनुष्यों में अधमहैं अपसदहैं । वैश्य से मागध और वैदेह और क्षत्रिय से सूत, ये तीन भी प्रतिलोमभाव से पैदा होते हैं

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