मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished649 पृष्ठ
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| श्लोकः | पृष्ठम् | श्लोकः | पृष्ठम् |
|---|---|---|---|
| पयः पिवेत्त्रिरात्रं वा | ... ४२० | पाणिभ्यां तूपसंगृह्य | ... १०२ |
| परकीयनिपानेषु | ... १४६ | पाणिमुद्यम्य दण्डं वा | ... २६३ |
| परदाराभिमर्शेषु | ... ३०५ | पात्रस्य हि विशेषेण | ... २२१ |
| परदारेषु जायेते | ... ६४ | पादोऽधर्मस्य कर्तारम् | ... २४६ |
| परद्रव्येष्वभिध्यानम् | ... ४४३ | पानं दुर्जनसंसर्गः | ... ३२० |
| परपत्नीति या स्त्री स्यान् | ... ४५ | पानमक्षाः स्त्रियश्चैव | ... २१५ |
| परमं यत्नमातिष्ठेत् | ... २६७ | पारुष्यमनृतं चैव | ... ४४३ |
| परस्त्रियं योऽभिवदेत् | ... ३०६ | पार्ष्णिग्राहं च संवेक्ष्य | ... २४२ |
| परस्परविरुद्धानाम् | ... २३२ | पाखण्डमाश्रितानां च | ... १७५ |
| परस्य दण्डं नोद्यच्छेत् | ... १४२ | पाखण्डिनो विकर्मस्थान् | ... ११९ |
| परस्य पत्न्या पुरुषः | ... ३०५ | पिण्डनिर्वपणं केचित् | ... १०६ |
| पराङ्मुखस्याभिमुखः | ... ५७ | पिण्डेभ्यस्त्वल्पिकां मात्राम् | ... १०१ |
| परामप्यापदं प्राप्तः | ... ३७० | पिताचार्यः सुहृन्माता | ... ३०३ |
| परित्यजेदर्थकामौ | ... १४४ | पितामहो वा तच्छ्राद्धम् | ... १०२ |
| परिपूतेषु धान्येषु | ... ३०२ | पिता यस्य निवृत्तः स्यात् | ... १०२ |
| परिपूर्णे यथाचन्द्रम् | ... ३६६ | पिता रक्षति कौमारे | ... ३१८ |
| परिवित्तिः परिवेत्ता | ... ६४ | पिता वै गार्हपत्योऽग्निः | ... ६२ |
| परिवित्तितानुजेऽनूढे | ... ४०७ | पितुर्भगिन्यां मातुश्च | ... ४६ |
| परीक्षिताः स्त्रियश्चैनम् | ... २२४ | पितृदेवमनुष्याणाम् | ... ४५७ |
| परीवादात्खरो भवति | ... ५७ | पितृभिर्भ्रातृभिश्चैताः | ... ७५ |
| परेण तु दशाहस्य | ... २८४ | पितृयज्ञं तु निर्वर्त्य | ... ८६ |
| पलं सुवर्णाश्चत्वारः | ... २६६ | पितृवेश्मनि कन्या तु | ... ३४७ |
| पशवश्च मृगाश्चैव | ... ६ | पितॄणां मासिकं श्राद्धम् | ... ८६ |
| पशुमण्डूकमार्जार | ... १३५ | पितेव पालयेत्पुत्रान् | ... ३३६ |
| पशुषु स्वामिनां चैव | ... २८५ | पित्रा भर्त्रा सुतैर्वापि | ... १८५ |
| पशूनां रक्षणं दानम् | ... १७ | पित्रा विवदमानश्च | ... ६२ |
| पांसुवर्षे दिशां दाहे | ... १३३ | पित्रे न दद्याच्छुल्कं तु | ... ३३४ |
| पाटीनरोहितावाद्यौ | ... १६२ | पित्र्यं वा भजते शीलम् | ... ३८५ |
| पाणिग्रहणसंस्कारः | ... ७२ | पित्र्ये रात्र्यहनी मासः | ... १३ |
| पाणिग्रहणीका मन्त्राः | ... २८५ | पित्र्ये स्वदितमित्येवं | ... १०८ |
| पाणिग्राहस्य साध्वी स्त्री | ... १८७ | पिशुनः पूतिनासिक्यम् | ... ४०६ |