मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें७८ मनुस्मृति । धारण करनेवाला ) आदि नाम; शिव के चन्द्रशेखर, त्र्यम्बक, भूतेश आदि नाम; शक्ति के सरस्वती, लक्ष्मी, गौरी आदि नाम; गणेश के हेरम्ब, लम्बोदर आदि नाम; तथा सूर्य के विकर्त्तन, विरोचन आदि नाम; आकारोपाधिक होने से कृष्ण आदि पांच आकार ( विशेष्य ) के बोधक होते हैं । यदि विष्णु ( वेवेष्टि ) शिव ( शिवयति ) शक्ति ( शक्नोति ) गणेश ( गणानामीशः ) और सूर्य ( सुवति ) एकत्व विवक्षा से ग्रहण किये जायं तो आकारोपाधिक ( नियत रूप के बोधक ) न होनेसे परस्पर विशेषण-विशेष्य-भाव को प्राप्त होकर एक व्यक्ति ( परमेश्वर ) के बोधक होते हैं । यही रहस्य पञ्चा- यतन की मुख्य गुण-भाव-कल्पना में भी है । किं बहुना, पौराणिक तान्त्रिक सहस्रनाम-स्तोत्रों में ये दोनों प्रकार के नाम ( भेदक-अभेदक ) पढ़े हैं और इन्हीं विष्णु आदि नाम के अनुरोध से वैष्णव आदि उपासकों की संज्ञा हुई है ! और जो— ' छन्दांसि यज्ञाः क्रतवो व्रतानि भूतं भव्यं यच्च वेदा वदन्ति । अस्मान्मायी सृजते विश्वमेत- तस्मिंश्चान्यो मायया संनिरुद्धः ॥ मायां तु प्रकृतिं विद्यान्मायिनं तु महेश्वरम् । तस्यावयवभूतैस्तु व्याप्तं सर्वमिदं जगत् ॥' ( श्वे० उ० ४-५, १० ) इत्यादि उपनिषद् वाक्यों के अनुसार माया ( शक्ति ) और मायावान् ( शक्तिमान्-परमेश्वर ) ये धर्मधर्मि-भेद से दो पदार्थ कल्पना किये हैं, इनको चाहे लक्ष्मी और विष्णु शब्द