मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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यथासंभव पूर्वोक्त आयतन पीठपर षोडशोपचार वा पञ्चो- पचार वा मानसोपचार से पूर्वाह्न में पञ्चायतन पूजा वा इष्टदेव पूजा कीजाती है । यह पूजा आहिताग्नि को संध्योपासन और नित्य हवन के पश्चात्, अनाहिताग्नि को संध्योपासन के पश्चात् और द्विजभिन्न पवित्र जाति को स्नान के पश्चात् करना चाहिये । स्थापित प्रतिमा, शालग्राम और बाणलिङ्ग में आवा- हन, विसर्जन नहीं किये जाते । और शालग्राम तथा बाणलिङ्ग की पूजा में द्विजभिन्न को अधिकार नहीं है । विष्णु की पूजा में ऊर्ध्वपुण्ड्र और शिव आदि की पूजा में त्रिपुण्ड्र का लेख है । ऊर्ध्वपुण्ड्र और त्रिपुण्ड्र पूजाकाल में जल, भस्म वा गाङ्गादि पवित्र मृत्तिका से ही किये जाते हैं, पूजा के बाद देवशेष चन्दन से उनकी सजावट होती है। पञ्चदेवों में सूर्य को विल्वपत्र और गणेश को तुलसीपत्र चढ़ाना मना है, पर शिव को विल्वपत्र और विष्णु को तुलसीपत्र अतिप्रिय है। रुद्राक्षमाला से सब देवताओं के मन्त्र का जप होता है, पर विष्णु को तुलसीमाला शिव को रुद्राक्षमाला अतिप्रिय है । शालग्राम और बाणलिङ्ग आदि कतिपय मूर्तियों को छोड़कर औरों का नैवेद्य ग्रहण करना मना है । देवताओं के विशेष तीर्थ ये हैं—( १ ) अयोध्या, ( २ ) मधु ( धु ) रा, ( ३ ) द्वारका और काञ्चीका अर्धभाग, यों
१ । ( १ ) आवाहन, ( २ ) आसन, ( ३ ) पाद्य, ( ४ ) अर्घ्य, ( ५ ) आचमनीय, ( ६ ) स्नान, ( ७ ) वस्त्र, ( ८ ) उपवीत, ( ६ ) चन्दन, ( १० ) पुष्प, ( ११ ) धूप, ( १२ ) दीप, ( १३ ) नैवेद्य, ( १४ ) नमस्कार, ( १५ ) प्रदक्षिणा, ( १६ ) विसर्जन । ये उपचार पुरुषसूक्त से वा अन्य मन्त्रों से होते हैं । २ 'पूर्वाह्न एव कुर्वीत देवतानां च पूजनम् ।' मनु० ।