संक्षिप्त मार्कण्डेय पुराण
Markandeya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनवेंसे लेकर तेरहवें मन्वन्तरतकका संक्षिप्त वर्णन २४१
| मार्कण्डेय उवाच ॥ २६ ॥<br>इति दत्त्वा तयोर्देवी यथाभिलषितं वरम् ॥ २७ ॥<br>बभूवान्तर्हिता सद्यो भक्त्या ताभ्यामभिष्टुता ।<br>एवं देव्या वरं लब्ध्वा सुरथः क्षत्रियर्षभः ॥ २८ ॥<br>सूर्याज्जन्म समासाद्य सावर्णिर्भविता मनुः ॥ २९ ॥<br>एवं देव्या वरं लब्ध्वा सुरथः क्षत्रियर्षभः ।<br>सूर्याज्जन्म समासाद्य सावर्णिर्भविता मनुः ॥ क्लीं ॐ ॥ | मार्कण्डेयजी कहते हैं— ॥ २६ ॥ इस प्रकार उन दोनोंको मनोवाञ्छित वरदान देकर तथा उनके द्वारा भक्तिपूर्वक अपनी स्तुति सुनकर देवी अम्बिका तत्काल अन्तर्धान हो गयीं। इस तरह देवीसे वरदान पाकर क्षत्रियोंमें श्रेष्ठ सुरथ सूर्यसे जन्म ले सावर्णि नामक मनु होंगे ॥ २७–२९ ॥ |
इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे सावर्णिके मन्वन्तरे देवीमाहात्म्ये सुरथवैश्ययोर्वरप्रदानं नाम त्रयोदशोऽध्यायः ॥ १३ ॥
उवाच ६, अर्धश्लोकाः २१, श्लोकाः १३, एवम् ३०, अध्यायाः ॥ ७०० ॥
समस्ता उवाचमन्त्राः ५७, अर्धश्लोकाः ४२, श्लोकाः ५३५, अध्यायसमाप्तिश्चैव ॥
इस प्रकार श्रीमार्कण्डेयपुराणमें सावर्णिक मन्वन्तरकी कथाके अन्तर्गत देवीमाहात्म्यमें 'सुरथ और वैश्यको वरदान' नामक तेरहवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ १३ ॥
नवेंसे लेकर तेरहवें मन्वन्तरतकका संक्षिप्त वर्णन
**मार्कण्डेयजी कहते हैं—**क्रौष्टुकिजी! यह तुमसे सावर्णिक मन्वन्तरका भलीभाँति वर्णन किया गया। साथ ही महिषासुर-वध आदिके रूपमें भगवती दुर्गाकी महिमा भी बतलायी गयी। मुनिश्रेष्ठ! अब दूसरे सावर्णिक मन्वन्तरकी कथा सुनो। दक्षके पुत्र सावर्णि नवें मनु होनेवाले हैं। उनके समयमें जो देवता, मुनि और राजा होंगे, उन सबके नाम सुनो। पार, मरीचिगर्भ और सुधर्मा—ये तीन प्रकारके देवता होंगे। इनमेंसे प्रत्येक वर्गमें बारह-बारह देवता होंगे। इस समय जो छः मुखोंवाले अग्निकुमार कार्तिकेय हैं, वे ही उस मन्वन्तरमें 'अद्भुत' नामवाले इन्द्र होंगे। मेधातिथि, वसु, सत्य, ज्योतिष्मान्, द्युतिमान्, सबल तथा हव्यवाहन—ये सप्तर्षि होंगे। धृष्टकेतु, बर्हिकेतु, पञ्चहस्त, निरामय, पृथुश्रवा, अर्चिष्मान्, भूरिद्युम्न तथा बृहद्भव—ये दक्षपुत्र सावर्णि मनुके राजकुमार होंगे।
अब दसवें मनुके मन्वन्तरका वर्णन सुनो। दसवें मन्वन्तरमें ब्रह्माजीके पुत्र बुद्धिमान् सावणिका अधिकार होगा। ब्रह्मसावर्णि मन्वन्तरमें सुखासोन और विरुद्ध—ये दो प्रकारके देवता होंगे। उनकी संख्या सौ होगी। उस समय सौ प्रकारके प्राणी उत्पन्न होंगे, इसलिये उनके देवता भी सौ ही होंगे। उस मन्वन्तरमें इन्द्रके समस्त गुणोंसे युक्त 'शान्ति' नामक इन्द्र होंगे। आपोमूर्ति, हविष्मान्, सुकृत, सत्य, नाभाग, अप्रतिम और वासिष्ठ—ये सप्तर्षि होंगे। सुक्षेत्र, उत्तमीजा, भूमिसेन, वीर्यवान्, शतानीक, वृषभ, अनमित्र, जयद्रथ, भूरिद्युम्न तथा सुवर्मा—ये मनुके पुत्र होंगे।
अब धर्मके पुत्र सावणिका मन्वन्तर सुनो। धर्मसावर्णि मन्वन्तरमें विहङ्गम, कामग तथा निर्माणरति—ये तीन प्रकारके देवता होंगे। इनमेंसे एक-एक तीस-तीस देवताओंका समुदाय है। मास, ऋतु और दिन—ये निर्माणरति कहलायेंगे। रात्रियोंकी संज्ञा विहङ्गम होगी और मुहूर्तसम्बन्धी गण कामग कहलायेंगे। विख्यात पराक्रमी 'धूप' उनके