संक्षिप्त मार्कण्डेय पुराण
Markandeya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें- वत्सप्रीके द्वारा कुजृम्भका वध तथा उसका मुदावतीके साथ विवाह * २६९
मूसलसे युद्ध आरम्भ किया; किन्तु उसके शत्रुओंपर मूसलके प्रहार व्यर्थ सिद्ध होने लगे। उस दिव्य अस्त्रके निर्बल पड़ जानेपर दैत्यने दूसरे अस्त्र-शस्त्रोंद्वारा शत्रुका सामना किया। राजकुमारने उसे रथहीन कर दिया। तब वह ढाल-तलवार लेकर उसकी ओर दौड़ा। उसे क्रोधमें भरकर वेगसे आते देख राजकुमारने कालाग्निके समान प्रज्वलित
आग्नेय-अस्त्रसे उसपर प्रहार किया। उससे दैत्यकी छातीमें गहरी चोट पहुँची और उसके प्राणपखेरू उड़ गये। उसके मारे जानेपर रसातलनिवासी बड़े-बड़े नागोंने महान् उत्सव मनाया। राजकुमारपर फूलोंकी वर्षा होने लगी। गन्धर्वराज गाने लगे और देवताओंके बाजे बज उठे। राजकुमार वत्सप्रीने उस दैत्यको मारकर राजा विदूरथके दोनों पुत्रों तथा कृशाङ्गी कन्या मुदावतीको भी बन्धनसे मुक्त किया। कुजृम्भके मारे जानेपर नागोंके अधिपति शेषसंज्ञक भगवान् अनन्तने उस मूसलको ले लिया। मुदावतीने सुनन्द नामक मूसलके गुणको
जानकर उसका बारंवार स्पर्श किया था, इसलिये नागराज अनन्तने उसका नाम सुनन्दा रख दिया। तत्पश्चात् राजकुमारने भाइयोंसहित उस कन्याको शीघ्र ही पिताके पास पहुँचाया और प्रणाम करके कहा—'तात! आपकी आज्ञाके अनुसार मैं आपके दोनों पुत्रों और इस मुदावतीको भी छुड़ा लाया। अब मुझसे और भी जो कार्य लेना हो, उसके लिये आज्ञा कीजिये।'
इसपर महाराज विदूरथके मनमें बड़ी प्रसन्नता हुई। वे उच्चस्वरसे बोले—'बेटा! बेटा!! तूने बहुत अच्छा किया, बहुत अच्छा किया। आज देवताओंने तीन कारणोंसे मेरा सम्मान बढ़ाया है—एक तो तुम जामाताके रूपमें मुझे प्राप्त हुए,
दूसरे मेरा शत्रु मारा गया तथा तीसरे मेरी सन्तानें कुशलपूर्वक लौट आयीं; अतः आज शुभ मुहूर्तमें तुम मेरी इस कन्याका पाणिग्रहण करो।' यों कहकर राजाने उन दोनोंका विधिपूर्वक विवाह कर दिया। नवयुवक वत्सप्री मुदावतीके साथ