मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)
Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४० मार्क्सवाद और रामराज्य अनभिज्ञता केवल विकासवादियोंको ही सम्मत है, पर विकासवादियोंकी अनभिज्ञता उभयसम्मत है; क्योंकि वे स्वयं ही अपने पुत्रादिकोंकी अपेक्षा अपनेको उसी न्यायसे अनभिज्ञ मानते हैं। 'परिमाणसम्बन्धी विकाससे गुणसम्बन्धी विकासतकका नाम द्वन्द्वात्मक विकास है।' इसकी व्याख्या करते हुए एंजिल्सने लिखा है कि 'भौतिक विज्ञानमें प्रत्येक परिवर्तनका अर्थ है—परिमाणका गुणमें संक्रमण । जो किसी भी वस्तुमें निहित अथवा प्रविष्ट गतिके परिमाणमें परिवर्तन होता है, वह भी क्रमसे ही होता है। उदाहरणके लिये पानीके ताप-मानका प्रभाव पहले उसके द्रवगुणपर नहीं पड़ता। परंतु उस द्रवगुणका परिमाण ज्यो-ज्यो चढता या गिरता है, त्यों त्यो वह क्षण निकट आता-जाता है, जब पानी या तो बर्फ होगा या भाप बनेगा। जलकी द्रवस्थिति ज्यों-की-त्यों नहीं बनी रहती। प्लेटिनमके तारको भी दहकानेके लिये एक अल्पतम विद्युत्प्रवाह आवश्यक होता है। प्रत्येक धातुका एक निश्चित तापमान होता है, जब वह पिघलने लगती है। आवश्यक तापमान पानेके हमारे पास जो साधन हैं, उनका प्रयोग करके द्रवपदार्थके शीतोष्ण दिन निश्चित कर दिये गये हैं, जब कि यथेष्ट शीतोष्ण प्रभावसे वह पदार्थ जमने या खौलने लगता है। अन्तमें प्रत्येक गैसके लिये वह चरम विन्दु निश्चित है, जब यथावश्यक दबाव और शीतसे वह द्रव पदार्थके रूपमें परिवर्तित किया जा सकता है, भौतिक विज्ञानमें जिन्हें हम स्थिर विन्दु कहते हैं, जहाँसे पदार्थकी स्थिति बदलकर दूसरी हो जाती है; वे अधिकतर और कुछ नहीं, क्रान्ति विन्दुओंके ही नाम हैं, जहाँ गतिके परिमाण-सम्बन्धी ह्रास किंवा वृद्धिसे उस पदार्थकी स्थितिमें एक गुणात्मक परिवर्तन हो जाता है। फलतः इन क्रान्ति-विन्दुओंपर परिमाणमें गुणका रूपान्तर हो जाता है। एंजिल्सका प्रकृतिसम्बन्धी द्वन्द्ववाद इसी प्रकार एंजिल्सने रसायनशास्त्रके विषयमें लिखा है कि 'पदार्थोंकी अणु- बद्ध रचनामें परिवर्तन होनेसे गुणात्मक परिवर्तन सम्भव होते हैं। इन गुणात्मक परिवर्तनोंके विज्ञानको हम 'रसायनशास्त्र' कह सकते हैं। हेगलको यह मालूम हो चुका था। उदाहरणके लिये आक्सिजनके अणुमे दो परमाणु होते हैं। इन दोके बदले यदि तीन परमाणु कर दिये जायें, तो ओजोन बन जाता है, जो गन्ध और प्रतिक्रियामें साधारण आक्सिजनसे नितान्त भिन्न होता है। जब आक्सिजन विभिन्न अनुपातोंमे नाइट्रोजन या गन्धकसे मिलाया जाता है, तब तो उसका कहना ही क्या ? हर अनुपातसे ऐसा पदार्थ बनता है, जो गुणात्मक दृष्टिसे दूसरे पदार्थोंसे भिन्न होता है।' उपर्युक्त दोनो ही प्रघट्टकोंसे यह सिद्ध होता है कि निर्दिष्ट कारणोंसे वस्तुओंकी अवस्थाओंमें परिवर्तन ही सिद्ध होता है। वेदान्त-सिद्धान्तके अनुसार तेजसे ही जल उत्पन्न होता है, शीतके योगसे वह बर्फ बन जाता है। तेजसे जलका शुष्क हो जाना लोकसिद्ध है, परतु फिर भी इन परिणामोंकी निश्चित