मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)
Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसमान भौतिक ही होना चाहिये', परंतु यह ठीक नहीं है । कारण कि उपकार्योप- कारकभाव सजातीयमें होनेका कोई नियम नहीं है । पार्थिव ईंधनसे—तृण-काष्ठादिसे, अग्निका प्रज्वलनरूप उपकार होता है, यहाँ अग्निका काष्ठादिसे कोई साजात्य नहीं है और यह भी नहीं कहा जा सकता कि पार्थिव तृणादिसे प्रज्वलनोपकार देखा गया है, अतः पार्थिवत्वादि जातीयसे ही अग्निका उपकार हो, क्योकि वैद्युत अग्नि एव जाठर अग्निका उपकार जलसे ही होता है । इस दृष्टिसे उपकार्योपकारक- भावमें सजातीयता-असजातीयताका कोई नियम नहीं है । अनेक बार देखा जाता है कि स्थावरों तथा पशु आदिकोसे मनुष्योंका उपकार होता है ।
जो कहा जाता है कि 'अदृश्यत्व अतीन्द्रियत्वके कारण कार्य-करण- सघातका भासक तथा उपकारक ज्योतिको अभौतिक नहीं कहा जा सकता, क्योकि चक्षुरादि अतीन्द्रिय एवं अदृश्य होनेपर अभौतिक नहीं, किंतु भौतिक ही हैं । इसी तरह कार्य-करणसघातकी भासक ज्योतिको सघातका ही धर्म मानना