भारतकोश
मत्स्य महापुराण

मत्स्य महापुराण

Matsya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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१०३८* मत्स्यपुराण *
अजातशत्रुर्भविता पञ्चविंशत् समा नृपः।<br>पञ्चविंशत् समा राजा दर्शकस्तु भविष्यति॥ ९<br><br>उदासी* भविता तस्मात् त्रयस्त्रिंशत् समा नृपः।<br>स वै पूर्वपरं राजा दक्षिणयां कुसुमाह्वयम्॥ १०<br><br>गङ्गाया दक्षिणे कूले चतुर्थे तु करिष्यति।<br>चत्वारिंशत् समा भाव्यो राजा वै नन्दिवर्धनः॥ ११बिम्बसार राजा होगा। फिर पच्चीस वर्षोंतक अजातशत्रु नामक राजा होगा। तदनन्तर उसका पुत्र दर्शक राजा होगा, जो पैंतीस वर्षोंतक राज्य करेगा। फिर उदासी नामक राजा तैंतीस वर्षोंतक शासन करेगा। वह राज्यके चतुर्थ वर्षमें गङ्गाके दक्षिण तटपर कुसुमपुर या पाटलीपुत्र (पटना) नगर बसायेगा। उसके बाद चालीस वर्षोंतक नन्दिवर्धन राजा होगा॥ ९—११॥
चत्वारिंशत् त्रयश्चैव महानन्दी भविष्यति।<br>इत्येते भवितारो वै शिशुनागाः नृपा दश॥ १२<br><br>शतानि त्रीणि पूर्णानि षष्टिवर्षाधिकानि तु।<br>शिशुनागा भविष्यन्ति राजानः क्षत्रबान्धवाः॥ १३<br><br>एतैः सार्धं भविष्यन्ति यावत् कलिनृपाः परे।<br>तुल्यकालं भविष्यन्ति सर्वे ह्येते महीक्षितः॥ १४<br><br>चतुर्विंशत्तथैक्ष्वाकाः पाञ्चालाः सप्तविंशतिः।<br>काशेयास्तु चतुर्विंशदष्टाविंशत् तु हैहयाः॥ १५<br><br>कलिङ्गाश्चैव द्वात्रिंशदश्मकाः पञ्चविंशतिः।<br>कुरवश्चापि षड्विंशदष्टाविंशास्तु मैथिलाः॥ १६<br><br>शूरसेनास्त्रयोविंशद् वीतिहोत्राश्च विंशतिः।<br>एते सर्वे भविष्यन्ति एककालं महीक्षितः॥ १७<br><br>महानन्दिसुतश्चापि शूद्रायां कलिकांशजः।<br>उत्पत्स्यते महापद्मः सर्वक्षत्रान्तको नृपः॥ १८<br><br>ततः प्रभृति राजानो भविष्याः शूद्रयोनयः।<br>एकराट् स महापद्मो एकछत्रो भविष्यति॥ १९<br><br>अष्टाशीतिस्तु वर्षाणि पृथिव्यां च भविष्यति।<br>सर्वक्षत्रमथोत्साद्य भाविनाथेन चोदितः॥ २०तदनन्तर तैंतालीस वर्षोंतक महानन्दी राजा होगा। ये दस राजा शिशुनागके बाद इस वंशमें उत्पन्न होंगे। इस प्रकार कुल मिलाकर तीन सौ साठ वर्षोंतक शिशुनागवंशीय राजा राज्य करेंगे, जो क्षत्रियोंमें निम्नकोटिके क्षत्रिय होंगे। इन्हीं राजाओंके साथ कलियुगमें अन्य राजा भी होंगे, जो सभी समसामयिक होंगे। उनमें चौबीस इक्ष्वाकुवंशीय, सत्ताईस पाञ्चालके, चौबीस काशीके, अट्ठाईस हैहयवंशीय, बत्तीस कलिंगदेशीय, पच्चीस अश्मक (महाराष्ट्री), छब्बीस कुरुदेशी, अट्ठाईस मैथिल, तेईस शूरसेन देश (माथुर मण्डल)-के तथा बीस वीतिहोत्रवंशीय—ये सभी राजा एक समयमें ही राज्य करेंगे। महानन्दिका पुत्र महापद्म कलियुगके अंशरूपसे शूद्राके गर्भसे उत्पन्न होगा। यह राजा सम्पूर्ण क्षत्रियोंका विनाशक होगा। तभीसे शूद्राके गर्भसे उत्पन्न होनेवाले लोग राजा होंगे। वह महापद्म एकछत्र सम्राट् होगा, जो अट्ठासी वर्षोंतक पृथ्वीका उपभोग करेगा। वह भावीवश समस्त क्षत्रिय राजाओंका विनाश कर डालेगा॥ १२—२०॥
सुकल्पादिसुता ह्यष्टौ समा द्वादश ते नृपाः।<br>महापद्मस्य पर्याये भविष्यन्ति नृपाः क्रमात्॥ २१<br><br>उद्धरिष्यति तान् सर्वान् कौटिल्योः वैद्विरष्टभिः।<br>भुक्त्वा महीं वर्षशतं ततो मौर्यान् गमिष्यति॥ २२<br><br>भविता शतधन्वा च तस्य पुत्रस्तु षड् समाः।<br>बृहद्रथस्तु वर्षाणि तस्य पुत्रश्च सप्ततिः॥ २३तदनन्तर उस महापद्मके वंशमें सुकल्प आदि आठ पुत्र राजा होंगे, जो क्रमशः केवल बारह वर्षोंतक राज्य करेंगे। बारह वर्षोंके बाद कौटिल्य महापद्मके पुत्रोंको उखाड़ देगा। फिर उसके सौ वर्षोंतक राज्य करनेके बाद यह राज्य मौर्यवंशके अधिकारमें चला जायगा। इसके पश्चात् उसका पुत्र शतधन्वा होगा, जो छः वर्षोंतक राज्य करेगा। उसके बाद उसका पुत्र बृहद्रथ सत्तर वर्षोंतक

* अन्यत्र सर्वत्र 'उदयी' पाठ है