मत्स्य महापुराण

मत्स्य महापुराण
Matsya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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| * अध्याय २०१ * | ८३१ |
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| वसिष्ठस्तूपयेमेऽथ भगिनीं नारदस्य तु।<br>अरुंधतीं वरारोहां तस्यां शक्तिमजीजनत्॥ ३०<br><br>शक्तेः पराशरः पुत्रस्तस्य वंशं निबोध मे।<br>यस्य द्वैपायनः पुत्रः स्वयं विष्णुरजायत॥ ३१<br><br>प्रकाशो जनितो लोके येन भारतचन्द्रमाः।<br>येनाज्ञानमोऽन्धस्य लोकस्योन्मीलनं कृतम्।<br>पराशरस्य तस्य त्वं शृणु वंशमनुत्तमम्॥ ३२ | देवर्षि नारदकी बहन सुन्दरी अरुन्धतीसे विवाह किया और उसके गर्भसे शक्ति नामक पुत्रको उत्पन्न किया। शक्तिके पुत्र पराशर हुए। अब मुझसे उनके वंशका वर्णन सुनिये। स्वयं भगवान् विष्णु पराशरके पुत्र-रूपमें द्वैपायन नामसे उत्पन्न हुए, जिन्होंने इस लोकमें भारतरूपी चन्द्रमाको प्रकाशित किया, जिससे अज्ञानान्धकारसे अन्धे हुए लोगोंके नेत्र खुल गये। अब उन पराशरके श्रेष्ठ वंशकी परम्परा सुनिये॥२९—३२॥ |
| काण्डशयो वाहनपो जैह्रपो भौमतापनः।<br>गोपालिरेषां पञ्चम एते गौराः पराशराः॥ ३३<br><br>प्रपोह्या वाह्यमयाः ख्यातेयाः कौतुजातयः।<br>हर्यश्विः पञ्चमो ह्येषां नीला ज्ञेयाः पराशराः॥ ३४<br><br>कार्ष्णायनाः कपिमुखाः काकेयस्था जपातयः।<br>पुष्करः पञ्चमश्चैषां कृष्णा ज्ञेयाः पराशराः॥ ३५<br><br>श्राविष्ठायनबालेयाः स्वायष्ठाश्चोपयाश्च ये।<br>इषीकहस्तश्चैते वै पञ्च श्वेताः पराशराः॥ ३६<br><br>वाटिको बादरिश्चैव स्तम्बा वै क्रोधनायनाः।<br>क्षैमिरेषां पञ्चमस्तु एते श्यामाः पराशराः॥ ३७<br><br>खल्यायना वार्ष्णायनास्तैलेयाः खलु यूथपाः।<br>तन्तिरेषां पञ्चमस्तु एते धूम्राः पराशराः॥ ३८<br><br>पराशराणां सर्वेषां त्र्यार्षेयः प्रवरो मतः।<br>पराशरश्च शक्तिश्च वसिष्ठश्च महातपाः।<br>परस्परमवैवाह्या सर्व एते पराशराः॥ ३९<br><br>उक्तास्तवैते नृप वंशमुख्याः<br> पराशराः सूर्यसमप्रभावाः।<br>येषां तु नाम्नां परिकीर्तितेन<br> पापं समग्रं पुरुषो जहाति॥ ४० | काण्डशय, वाहनप, जैहाप, भौमतापन और पाँचवें गोपालि—ये गौर पराशर नामसे प्रसिद्ध हैं। प्रपोह्य, वाह्यमय, ख्यातेय, कौतुजाति और पाँचवें हर्यश्वि—इन्हें नील पराशर जानना चाहिये। कार्ष्णायन, कपिमुख, काकेयस्थ, जपाति और पाँचवें पुष्कर—इन्हें कृष्ण पराशर समझना चाहिये। श्राविष्ठायन, बालेय, स्वायष्ट, उपय और इषीकहस्त—ये पाँच श्वेत पराशर हैं। वाटिक, बादरि, स्तम्ब, क्रोधनायन और पाँचवें क्षैमि—ये श्याम पराशर हैं। खल्यायन, वार्ष्णायन, तैलेय, यूथप और पाँचवें तन्ति—ये धूम्र पराशर हैं। इन सभी पराशरोंके पराशर, शक्ति और महातपस्वी वसिष्ठ—ये तीन ऋषि प्रवर माने गये हैं। इन सभी पराशरोंका परस्पर विवाह-सम्बन्ध निषिद्ध है। राजन्! मैंने आपसे सूर्यके समान प्रभावशाली पराशरवंशी गोत्रप्रवर्तक ऋषियोंका वर्णन कर दिया। इनके नामोंके परिकीर्तनसे मनुष्य सभी पापोंसे मुक्त हो जाता है॥३३—४०॥ |
इति श्रीमात्स्ये महापुराणे प्रवरानुकीर्तने पराशरवंशवर्णनं नामैकाधिकद्विशततमोऽध्यायः॥ २०१॥
इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणके प्रवरानुकीर्तनमें पराशर-वंश-वर्णन नामक दो सौ एकवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ॥ २०१॥
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