भारतकोश
मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

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पञ्चदशोऽध्यायः 卐 पादप्रमाणद्रव्यपरिग्रहविधानम् १५३ वारिस्रावो विवृद्ध्यर्थः क्षीरं पुत्रविवर्धनम्। शोणितं स्वामिनं हन्याद्वर्जयेत्तं प्रयत्नतः ॥९३॥ कटे स्थान से यदि जल बहे तो वह वृक्ष गृहस्वामी को वृद्धि प्रदान करता है। यदि दूध का स्राव हो तो पुत्रों की वृद्धि प्रदान करने वाला तथा रक्त का ( लाल वर्ण का स्राव ) स्राव गृहस्वामी को मृत्यु प्रदान करने वाला होता है। ऐसे वृक्ष को प्रयत्नपूर्वक छोड़ देना चाहिये॥९३॥ पतने सिंहशार्दूलहस्तिशब्दाः सुशोभनाः । रुदितं हसितं क्रोशं कूजितं निन्दितं वरैः ॥९४॥ कटे वृक्ष के गिरने के समय यदि सिंह, शार्दूल एवं गज के स्वर सुनाई पड़ें तो शुभ होता है। इसके विपरीत विद्वानों ने रोदन, हँसने, आक्रोशपूर्ण एवं गुञ्जन के स्वर को निन्दनीय कहा है॥९४॥ पातयेदुत्तराग्रं तु पूर्वाग्रं वा वनस्पतिम् । ते दिशौ शुभदे स्यातामन्याशासु विपर्यये ॥९४॥ वृक्ष यदि पूर्व या उत्तर दिशा की ओर अभिमुख होकर गिरे तो दोनों दिशायें शुभ होती हैं। अन्य दिशाओं में वृक्ष का पतन विपरीत परिणाम प्रदान करता है॥९५॥ सालाश्मर्यजकर्णीनामूर्ध्वं तु पतनं शुभम्। मूले पृष्ठागमे बन्धुप्रेष्ययोश्च विनाशनम् ॥९६॥ यदि साल, अश्मरी एवं अजकर्णी वृक्षों का ऊर्ध्व भाग गिरे तो शुभ; किन्तु यदि पतन होते समय ऊपरी भाग नीचे एवं पृष्ठ या मूल भाग ऊपर होकर गिरे तो गृहस्वामी के बन्धु-बान्धवों एवं परिचारकों का विनाश होता है॥९६॥ निर्गमत्स्थितिमद् भूत्वा वृक्षान्तरनिपातने । शिरःसङ्गेन नाशः स्यान्मूलसङ्गे श्रमो भवेत् ॥९७॥ काटने के पश्चात् अन्य वृक्षों के मध्य गिरता हुआ वृक्ष यदि अन्य वृक्षों के शीर्ष भाग से सहारा पाकर गिरने से रुक जाता है तो गृहस्वामी का विनाश होता है तथा जड़ के सहारे रुकने पर गृहस्वामी के अस्वास्थ्य का कारण बनता है॥९७॥ शरीरभङ्गं कर्तॄणां नाशमग्रेऽप्यपत्यहृत् । अन्योन्यपतनं पूज्यं छेदं चोभयतः समम् ॥९८॥ यदि वृक्ष का मध्य भाग टूट जाय तो वृक्ष काटने वाले का नाश होता है तथा शीर्ष भाग के टूटने पर सन्तति का नाश होता है। वृक्षों का एक-दूसरे पर गिरना ( एक