भारतकोश
मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

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पृष्ठ 25

॥ श्रीः॥ दानवराजमयप्रणीतं मयमतम् शिवार्पिताहिन्दीव्याख्योपेतम् M.Katyayana अथ प्रथमोऽध्यायः ( संग्रहाध्यायः ) ❋ मङ्गलाचरणम् ❋ प्रणम्य शिरसा देवं सर्वज्ञं जगदीश्वरम्। तं पृष्ट्वास्मादलं श्रुत्वा शास्ति शास्त्रं यथाक्रमम् ॥१॥ सर्वस्व के ज्ञाता, संसार के स्वामी देवता को सिर झुका कर प्रणाम करने के पश्चात् मैं ( मय ) ने उनसे ( वास्तुशास्त्र से सम्बन्धित ) प्रश्न किया एवं उनसे पर्याप्त शास्त्र-श्रवण करने के पश्चात् क्रमानुसार उस शास्त्र का उपदेश करता हूँ।।१।। तैतिलानां मनुष्याणां वस्त्वादीनां सुखोदयम्। प्राज्ञो मुनिर्मयः कर्त्ता सर्वेषां वस्तुलक्षणम् ॥२॥ देवों एवं मनुष्यों के सभी प्रकार के वास्तु आदि ( भूमि, भवन एवं उपस्कर आदि ) के विद्वान् स्थपति मय मुनि सुख प्रदान करने वाले सभी प्रकार के वास्तु के लक्षण का उपदेश करते हैं।।२।। ❋ ग्रन्थविषयसूचना ❋ आदौ वस्तुप्रकारं च भूपरीक्षापरिग्रहम्। मानोपकरणं चैव शङ्कुस्थापनमार्गकम् ॥३॥ वास्तुकार्य के प्रारम्भिक चरण में प्रथमतः ध्यातव्य तथ्य है—सर्वप्रथम भूमि एवं भवन के प्रकार ( भेदों ) का ज्ञान, तत्पश्चात् भूमि के गुण-दोषों की परीक्षा। उपयुक्त