मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवियोगाभिव्यक्ति ' ४७ ३२ म्हारे घर होता जाज्यो राज । अब के जिन¹ टाला दे जावो, सिर पर राखूँ विराज । पावणडा² म्हाके भले ही पधारो, सब ही सुधारण काज । म्हे तो जनम जनम की दासी, थे म्हारा सिरताज । म्हे तो बुरी छा,थाके भली छै घणेरी,तुम हो एक रसराज । थाने हम सब दिन की चिंता,तुम सब के हो गरीब निवाज । सब के मुगुट सिरोमनि, सिर पर मानूँ पुण्य की लाज । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, बाह गहे की लाज ॥६०। '† पाठान्तर १, होता जाज्यो राज, महलाँ म्हारे होता जाज्यो राज । मे अगुणी मेरा साहब सुगुणा, सत सवारे काज । मीराँ के प्रभु मन्दिर पधारो, कर केसरिया साज ।† इस द्वितीय पाठान्तर की भाषा अधिक शुद्ध है । प्रथम पाठ की अभिव्यक्ति मे पूर्वापर सबंध का अभाव है। ३३ साजन, बेगा³ घर आज्यो जी । आदि अतर रा यार हमारा, हम को सुख लाज्यो जी । निसि दिन चित चरणा धरू, हो मनडा ते न बिसरू । नजरि परै तुजि ऊपरि, धन जोवन वारू । हो मे पतिवरता रावरी, काहू तन काजै जी । अपनी वोरि निहारि के, प्रीति निभाज्यो जी । हरि बिन सुरति कहा धरू, नित मारग जोऊ जी । १ नही, २ अतिथि, ३ शीघ्र ।