भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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वियोगाभिव्यक्ति. ४९ देस विदेस सदेश न पूगे१, बिरहिन तलफे साथ नै । प्यारा महरम दिल की जाणै, और न जाणै कोई बात नै । मीराँ दरसण कारण झूरै, ज्यूँ बालक झूरै मात नै । ॥६४॥ पद की चतुर्थ पंक्ति मे प्रयुक्त 'महरम' शब्द की अर्थ संगति नही बैठती। इस शब्द के बदले 'म्हारा' कर देने से अर्थ स्पष्ट हो जाता है। भाषा के दृष्टिकोण से भी यह गलत नही हो सकेगा क्योकि पद की भाषा राजस्थानी ही है। ३७ पतिया ने कूण पतीजै,२ आणि खबरि हरि लीजै। झूठी पतिया लिख लिख भेजे, क्या लीजै क्या दीजै। ऐसा है कोइ बाच३ सुणावै, मै बाचू तो भीजै। मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, चरण कमल चित दीजै। ॥६५॥ प्रथम और तृतीय पंक्ति का निम्नांकित पाठान्तर भी प्राप्त है। प्रथम पंक्ति "पतिया ने कूण पतीजै, म्हारो असुँवा सो अचल भीजै।" तृतीय पंक्ति "ऐसा है कोई बाच सुणावै, मैं बांचू तन छीजै।" ३८ थे छो म्हारा गुण रा सागर, औगुण (म्हारा) मत जाज्यो जी। लोक न धीजै (म्हारो) मन न पतीजै, मुखडारो सबद सुणाज्यो जी। मै तो दासी जनम जनम की, म्हारे आगण रमता आज्यो जी। मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, बेड़ो पार लगाज्यो जी। ॥६६॥† उपर्युक्त पद किसी अन्य पद का अंश मात्र प्रतीत होता है।

१ पहुचे, २ विश्वास करे ३ पढ़ कर। ४