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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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३ प्रियादास कृत 'भक्तमाल' मे प्राप्त जनश्रुतियो का एक विस्तृत सग्रह ही है। भक्त-गाथाओ मे अन्य महत्वपूर्ण ग्रथ 'चौरासी' और 'दो सौ बावन वैष्णवण की वार्ताएँ' है। इन ग्रथो की प्रामाणिकता ही सर्वथा सदिग्ध हैं, तिस पर ये साम्प्रदायिक ग्रथ भी है। इतना ही नही, दोनो ग्रथो मे प्राप्त उल्लेख परस्पर विरोधात्मक भी है। ऐसी स्थिति मे इनको भी निश्चित प्रमाण स्वरूप उपस्थित नही किया जा सकता। मीराँ का सम्बन्ध राजस्थान के दो विख्यात राजकुलो से था अत मीराँ के जीवन-वृत्त को एक सुदृढ रूपरेखा देने के लिये राजस्थान का इतिहास भी अपेक्षित है। राजस्थान का इतिहास लिखते हुए कर्नल टाड ने मीराँ के जीवन- वृत्तान्त पर ऐतिहासिक दृष्टिकोण से विचार करने का सर्व-प्रथम प्रयास किया। कर्नल टाड द्वारा हुए इस प्रयास के पूर्व मीराँ का प्राप्त जीवन- वृत्त अलौकिक गाथाओ से परिपूर्ण एक अतिरजित पौराणिक कथा मात्र था। यत्किचित प्राप्त प्रमाण और जनश्रुतियो के आधार पर कर्नल टाड ने मीराँ को राणा कुम्भ की रानी सिद्ध किया। 'एनाल्स एन्ड एन्टीक्वी- टीस आफ राजस्थान' देखने से यह सुस्पष्ट हो जाता है कि मीराँ के पिता कौन थे इसका निर्णय वे स्वय भी न कर सके। कर्नल टाड के मतानुसार मीराँ को राणा कुम्भ की रानी मानने पर समय की सगति के आधार पर राव दूदा को ही मीराँ के पिता मानना युक्तियुक्त होता है। प्राप्त पदाभिव्यक्तियाँ इसका समर्थन भी करती है। कर्नल टाड के मत का खण्डन सर्व-प्रथम स्ट्रैटन ने अपनी पुस्तक 'मेवार एन्ड इट्स फेमिलीस' मे किया परन्तु वे भी कोई निश्चित प्रमाण नही देते। तदपश्चात् मुशी देवीप्रसाद ने कर्नल टाड का खण्डन करते हुए मीराँ को राव रत्नसिह की पुत्री और महाराणा सांगा के पुत्र भोजराज की विधवा सिद्ध करने का प्रयास किया। मुशी जी का यह प्रयास भी अपूर्ण व भ्रमाच्छादित ही सिद्ध होता है। मुंशी जी लिखित 'मीराँबाई का जीवन और उनका काव्य' देखने से ही यह निश्चित हो जाता है कि मुंशी जी स्वय भी सशय मे ही थे। मुंशी जी ने महकमे तवारीख, मेवाड, से प्राप्त दो विभिन्न समाचारो के आधार पर ही चलने का प्रयास किया। प्राप्त दोनो समाचार विरोधात्मक है। अत सर्व- प्रथम उनका आधार ही भ्रमात्मक सिद्ध हो जाता है। इसी तरह मीराँ