मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७४ मीरॉँ-बृहद्-पद-संग्रह ब्रजभाषा में प्राप्त पद १ मै तो चरण लगी गोपाल । जब लागी तब कोऊ न जाने, अब जानी ससार । किरपा कीजै, दरसण दीजै, सुध लीजै तत्काल । मीराँ कहै प्रभु गिरिधर नागर, चरण कमल बलिहार ॥११६॥ पद की द्वितीय पक्ति से व्यक्त होती भावना विशेष विचारणीय है। २ आलीरी मोरे नैनन बान पडी । चित चढी मेरे माधुरी मूरत, उर बिच आन अडी । कब की ठाढी पथ निहारूँ, अपने भवन खडी । कैसे प्राण पिया बिन राखूँ, जीवन भूल जडी । मीराँ गिरिधर हाथ बिकानी, लोग कहै बिगडी ॥ ११७ ॥ इस पाठ मे पहली पक्ति का निम्नाकित पाठान्तर भी मिलता है। “नैणा मोरे बाण पडी, भाई, मोहि दरस दिखाई”। ३ भाई, मेरे नैनन बान पडी री । जा दिन नैना श्यामहिं देख्यो, बिसरत नाहि घरी री । चित बस गई साँवरी सूरत, उर ते नाहिं टरी री । मीराँ हरि के हाथ बिकानी, सूरबस है निबरी री ॥ ११८ ॥